रविवार, 18 अगस्त 2013

tanu thadani यही सच है hey eshwar -3 तनु थदानी yahi sach hai हे ईश्वर -3

कहीं विश्वास है बिकता , कहीं  इज्ज़त भी बिकती  है !
हमारी  ये  सदी  तो  पूरा  , इक  बाज़ार   दिखती   है !

कहीं  जो  आग  लग  जाये , हमारे  दिल  झुलसते  हैं ,
उसी  पे   देख   मेरे  रहनुमा  की ,  रोटी   सिंकती   है !

यही  सच  है  तरलता  खो  गई , है   भावनाओं   की ,
सभी कुछ  हो गयें पत्थर ,कोई  खुशबू  न  टिकती  है !

यहाँ  सब  ठीक   है  बेटा , नहीं   चिंता  कोई   करना ,
नहीं माँ आजकल की , आजकल  चिट्ठी  में लिखती है !
------------- तनु थदानी



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