गुरुवार, 15 जनवरी 2015

tanu thadani तनु थदानी अरी सखी

एक्खट - दुक्खट लील गया,ये शहर कमीना !
अरी सखी ,न आना,कठिन है  यहाँ पे जीना !

चश्मे  काले  भीतर  आंखे , बदन  टटोले ,
घर भीतर भी हम आराम से, रहें कभी ना !

तोहरे गाँव मा अबहूं  , काका भईया हैं ना ?
शहर ने बीच चौराहे, इ सब रिश्ता छीना !


पेट की खातिर शर्म बिके,तुम समझ रही हो ?
यही शहर की बातें हमको , कभी जमी ना !
             -------------------  तनु थदानी

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