सोमवार, 21 जुलाई 2014

तुम्हें मरहम लगाता हूँ ,हमारे हाथ जलते हैं !
तुम्हें तो प्यार हो न हो , मगर हम प्यार करते हैं!

तुझे हम प्यार करते हैं प्रिय , इसलिए तुझको
तुझे कमियों के संग संग ही,स्वीकार करते हैं !

कोई जो संग शर्तों के , करे है प्यार की बातें ,
मेरी मानो वो प्रेमी  , प्रेम संग व्यापार करते हैं !



कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें