गुरुवार, 2 मई 2013

सचमुच हम शर्मिंदा हैं hey eshwar-3 (tanu thadani) हे ईश्वर -3 { तनु थदानी }

खुश  ना  होना  जश्न  देख  कर,अक्सर  मौका  आता  है  !
मेरे  देश  में  गम  अक्सर  यूँ   , भेष  बदल   भरमाता  है !

बहरूपियों  की  एक  सल्तनत , राज  करे  हम लोगों  पे ,
मीठी  बातें   करता  है  फिर , अपनी   थूक  चटाता  है !

सचमुच  हम  शर्मिंदा  हैं , ऐ  सरबजीत  ये  सच  भी है ,
कि  राजनीति  का मारा  पानी ,मांग  भी तो ना पाता  है !

जो  संसद  को  चकला  बोला , सीधा  जेल  में  जायेगा ,
बोल  के  पगला  पगले  को क्यूँ ,मुहँ  अपना नुचवाता  है !

मेरे  प्यारे  भारत  का अब , और  बुरा  भी  क्या  होगा ?
संविधान  की  आड़ में  कुत्ता , शेरों  को नचवाता  है !

हे  ईश्वर ! अब  इंसानों  को  ,तू  ही आ  कर  ये  समझा ,
विदा  जो  होगा  दुनियां से तब , ले  कर क्या जा पाता  है ?? 

  

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