रविवार, 11 अगस्त 2013

तुमको नहीं पता है ,चुपचाप रोती माँ है hey eshwar-3 (tanu thadani) हे ईश्वर -3 { तनु थदानी }

रूठे  हुए  हैं  हमसे ,खुशियों  के ताने- बाने !
परदेस  में  न  मिलते ,परिवार  के  खजाने !

जीने के लिए  तुमने,जो अपनी जमीं छोड़ी ,
ज़िंदा  नहीं तू  बिलकुल ,साँसे  तो हैं बहाने !

छाया  तो पकड़ लेगा,कोई गणित  लगा के , 
खुद  को  पकड़ने में ही,लग जायेगें ज़माने ! 

बहनों का मीठा  ताना,भाई का रूठ  जाना ,
वो  जा  रहें  हैं  देखो , यादों  में ही समाने !

कितने  भी  तर्क गढ़ ले ,निष्कर्ष तो यही है ,
घर  में  थी दाल-रोटी,बाहर भी वो ही दाने ! 


तुमको नहीं पता   है ,चुपचाप  रोती माँ  है , 
दुःख ढेर सारे होंगे ,क्या बोला कभी माँ  ने ? 

समझे थे जिसको दौलत,ढूंढा शहर-शहर में ,
क़दमों में मिले माँ के ,जीवन के पल सुहाने ! 

बिटिया का चंचल बचपन,न हाट में मिलेगा ,
लौटेगा जब  तलक तू ,वो  भूलेगी  तुतलाने !

जाना  तो कब्र  तक  है ,दौड़ो यहाँ-वहां तुम,
आएगी अकल कब तक,अब ये तो राम जाने ! 






    
    

  

1 टिप्पणी:

  1. कितने भी तर्क गढ़ ले ,निष्कर्ष तो यही है ,
    घर में थी दाल-रोटी,बाहर भी वो ही दाने !
    बेहद सुन्दर...हृदयस्पर्शी....

    अनु

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