मंगलवार, 16 सितंबर 2014

tanu thadani तनु थदानी हमारी भूख से है दोस्ती

जहाँ  एकांत  की  वारिस, कई  मज़बूरियां  होंगी !
वहाँ  मुस्कान  से खुशियों की भी , कुछ दूरियां होंगी !

यहाँ  जीवन  निपटता  है , महज़ इक घर बनाने में ,
ईमानदार    घर मालिक की शक्लें , झुर्रियाँ होंगी !

हमारे  देश के  नेताओं को , हल्के में ही  लेना  ,
उनकी बातें बड़ी , हाथों में मगर,  चूड़ियां  होंगी !

हमारी भूख से है दोस्ती , तुम   मानो न मानो ,
यहाँ बच्चों से सपने पूछो तो , बस पूरियां होगी !

सोमवार, 15 सितंबर 2014

tanu thadani तनु थदानी मुझे फिर से दुलारो माँ

ये  दुनियां  ठग  का है मेला ,ये  ठग तो,जुल्म ढ़ा  गयें !
हमारी  आत्मा  से  , आत्मीयता   , को   सुखा   गयें  !

किसी  जल्लाद  के  आगे ,मैं  इक  गर्दन  हूँ  दुनियां  में ,
कभी  जो  दोस्त  थें , जल्लाद  के , माने  सिखा  गयें !

तेरे  घर  आने  से  पहले , वो  बक्से  छोड़  आया  माँ ,
कि जिसमें दुनियां भर  के ,दर्द  ओं  दुःख,थें समा गयें !

मैं  रोऊं  क्यूँ  भला माँ , जो तुम्हें , देखा है अरसे बाद,
मेरी  आँखों  में  ये आँसू  तो , शगुन, बन  के  आ  गये !

मुझे  फिर  से  दुलारो  माँ , मुझे  फिर  से  संवारो  ना ,
ये  दुनियांदारी  वाले  कहकहे , दिल  को  दुखा  गयें !




गुरुवार, 21 अगस्त 2014

ना लोरियां , बाँहों का झूला , सो रहा बचपन !

ना लोरियां , बाँहों का झूला , सो रहा बचपन !
न  गोद  है  सिरहाने , न  ही प्यार का आँगन  !

ईटों  पे सर रख  , भूख ओढ़ , सो रहा बच्चा ,
ये  है  नहीं  कोई  कथा  , ये  देश  का  दर्पण  !

सपनों  में  भी  मासूम, माँ  को खोजता होगा ,
हम क्यों न हों विचलित,गिरे क्यूँ न अश्रु कण!

धरती  पे  ही  जब  है  नहीं ,सुकून ओं  मंगल  ,
हम ढ़ूंढ़ते हैं  क्यूँ  भला  , मंगल में जा जीवन  ?
---------------------------  तनु थदानी

शनिवार, 16 अगस्त 2014

tanu thadani तनु थदानी तेरे ही हक़ में कहता हूँ

तू कर मेहनत चुपचाप, सफलता , इक दिन शोर मचायेगी !
तू बाँट खुशी जग में , खुशियाँ , चल कर तेरे घर आयेंगी !

जिसने भी दिल में बैर रखा , दिल  बना दिया कचरा - डिब्बा ,
जब  दिल  में रखी गंदगी तो , फिर मख्खी  ही मंडरायेंगी !

हिन्दू - मुस्लिम - मंदिर - मस्जिद, रैली-रैला -दंगे- कर्फ्यू ,
सोचो  ये  बातें  भारत  की , कैसी  तस्वीर  बनायेंगी ?

जब  बात  मान कर माँ  की  हम  , अच्छे बच्चे बन जायेंगे ,
नेताओं  की  पूरी  जाति , फिर  भूखी  ही  मर  जायेंगी  !

कभी  सीधे  से , कभी  बिंब  बदल, मैं बात  पुरानी  कहता हूँ ,
तेरे  ही  हक़  में  कहता  हूँ , इक  रोज समझ तो आयेंगी !

जिसका जो काम वो ठीक- ठाक, बस काम वो अपना कर जाये ,
सचमुच  में  भारत  की  सड़कें , तब  सोने  की  बन जायेंगी !

मंगलवार, 5 अगस्त 2014

tanu thadani तनु थदानी माँ मुझे दो नींद के , कतरे कहीं से भेज दो ना

एक बचपन था सुहाना ,बस उसी बचपन को ला दो !
माँ दो ,घर दो,फिर चमकता,सा शहर ये दो या ना दो !

मैं  तरसता  हिचकियों  को , और  तेरी  रोटियों को ,
माँ  मुझे  या  हिचकियां  दे , या  मुझे  दे रोटियां दो !

माँ  मुझे  दो  नींद  के , कतरे  कहीं  से  भेज  दो ना ,
या  तू  मेरे संग  हो  ये ,मुठ्ठी भर अहसास ला दो !

एक  अंधा  सा  कुआं  है , ये  मुआ  परदेस  सारा ,
गिर  रहा  मैं ,माँ  मुझे बस, रौशनी की रस्सीयां दो !

एक खबरी ने बताया , छत  टपकती  है अभी तक,
माँ ओं मैं लाचार  दोनों , ऐ खुदा! बारिश तो ना दो !

रविवार, 3 अगस्त 2014

tanu thadani तनु थदानी हम नासमझ थे.

हम नासमझ थे धर्म की , बातों पे अड़ गये !
कंगले रहें हम, नेता जी के , घर ही भर गये !

बच्चे  को  ना  पढ़ा सके , न घर ही बनाया ,
टोपी तिलक के नाम ही , जीवन ये कर गये !

 हमारी  गरीबी  का  यही ,  अर्थशास्त्र   है ,
लड़े  बन  के  पशु  हम, पशु  खेत  चर गये !

गाजा में मरने वाले  या , कश्मीर  में पंडित,
दोनों  जगह  इंसान  थे , इंसान  मर  गये !

ईश्वर  हमारा  है   ,और  अल्लाह  तुम्हारा ?
कैसे  हमारी  अक्ल  पे ,पत्थर ये पड़ गये ??
----------------------    तनु थदानी


शनिवार, 2 अगस्त 2014

tanu thadani तनु थदानी काफिर ही मैं अच्छा

अल्लाह की ही सांसे हैं, मैं अल्लाह का बच्चा !
अल्लाह का सब  खेल  है , क्यूँ  खा रहे गच्चा ?

पैदल क्यूँ अकल से फिरे , धर्मों की सड़क पर,
लिख पढ़ के भी तू क्यूँ रहा ,है अक्ल से कच्चा ?

जो माँ की पूजा  करते  ही , काफिर मुझे  कहा ,
मुसलमान तुम अच्छे रहो ,काफिर ही मैं अच्छा !

ये सर- बदन- दिमाग-जात,  सब वतन की  है ,
जीया  जो वतन  के  लिये , इंसान वो  सच्चा !