शुक्रवार, 14 मार्च 2014

tanu thadani तू मेरी नींद में आना तनु थदानी


तू मेरी नींद में आना
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मेरे घर में नहीं बिटिया , मेरा घर खो गया है !
बहुत लाचार हूँ , मिलता नहीं , जो जो गया है !

अरे ! सीने पे पत्थर रख , मैं दुःख पी भी लेता ,
करूँ मैं क्या ,जो सीना मेरा ,पत्थर हो गया है !

बहुत चालाक था कि , सारी दुनियां  लूट  लूंगा ,
बिना बिटिया ये जीवन लुट गया,दिल रो गया है !

मेरी बिटिया  तेरी छम छम, मेरे अंतस में गूंजे ,
मेरा  भगवान  मेरे  अंदर , तुझको  बो गया  है !

तेरे बचपन, तेरी किलकारियों में , बंध गया मैं ,
तू  मेरी  नींद  में आना , ये  पापा  सो गया  है !

शनिवार, 8 मार्च 2014

tanu thadani chalo khatey kasm hain ab. चलो खाते कसम हैं अब तनु थदानी


क्या हम इंसान थें , या हिन्दू मुस्लिम, क्या बतायेंगे ?
हम अपने बच्चों को , जाने से पहले क्या बतायेंगे ?

हमारे  देश  को  फाड़ा गया , अखबार की मानिंद  ,
कि हम सब एक थें , सदियों से , कैसे भूल  पायेंगे !

हम  ही  बस श्रेष्ठ  हैं , बस इसलिए हम लड़ते रहते हैं  ,
वहाँ  अल्लाह -प्रभु  है एक, जहाँ हम मर के जायेंगे !

हमारे  पास  इक  सी  माँ  है , घर  है , बच्चे  इक  से है  !
हमारी  इक  सी  कोशिश  है , कि   कैसे  मुस्कुरायेंगे  !

कि जिस दिन ठान लेंगे हम,  की मोहरें  हम नहीं  इनके  ,
हमारे   मौलवी   पंडित  व नेता  , कर   क्या  पायेंगे  ?

महज   भाषा  से  हमको  जोड़  कर  ,  लड़वा  ये देते  हैं  !
तो  आखिर अक्ल को अपनी , बता हम कब जगायेंगे  ?

हमें  महफूज  रखनी है ये दुनिया ,  बच्चों की खातिर,
चलो  खाते  कसम हैं अब, कि   इंसा  बन  दिखायेंगे  !

शनिवार, 1 मार्च 2014

tanu thadani मौसम वोट का क्यूँ आया तनु थदानी

आँखें सपने भर लायी !
नेताओं ने लोरी गायी !

देश लुटा चप्पे - चप्पे ,
कौन  करेगा  भरपाई  ?

लाभ हानि ही पढ़ा लिखा,
फिर अपनी आयु खायी !

इज्जत केवल रस्म बनी ,
ये कैसी कालिख छायी ?

बोयी थी खामोशी फिर,
चींखे कैसे उग आयी ?

मौसम वोट का क्यूँ आया ?
गली गली है घबरायी !!

गुरुवार, 27 फ़रवरी 2014

tanu thadani. तनु थदानी चाहे मैं हिन्दू मुस्लिम तुम

तुम इत्र लगाओ हम कुमकुम  !
इक  जैसे ही तो हैं हम - तुम  !

हम  रोते  भी  तो इक  सा हैं ,
चाहे  मैं  हिन्दू  मुस्लिम  तुम  !

हंसते  हैं  हंसी भी इक जैसी ,
मरते   हैं  तो  हो  जाते  गुम  !

बुद्धु  हैं  तभी   तो शासक  ने,
माना  हमको बस एक हुजुम !

जब शक्ल  हमारी  इंसा  सी ,
आदत से क्यूँ  कुत्ते की दुम  !





मंगलवार, 25 फ़रवरी 2014

tanu thadani हम इतने तन्हा बैठे हैं तनु थदानी


मत पूछ क्यूँ उकड़ू लेटे हैं !
दीवाल ने  कमरे  फेंटे  हैं !

ग़ज़लें मेरी मेरे दुःख का ,
पूरा  संसार  समेटे  है !

उकताई  यूं  अब  तन्हाई,
खामोशी  लिये  लपेटे  है !

हर मिनट की साँसे गिनते हैं ,
हम  इतने  तन्हा  बैठे  हैं  !

मेरे घर बीच दीवाल  उठी ,
क्यूँ  कि  मेरे  दो  बेटे  हैं !

शनिवार, 22 फ़रवरी 2014

tanu thadani माँ ने अब तक पूछा ही नहीं तनु थदानी


माँ ने अब तक पूछा ही नहीं
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दुःख से जब मैं घिर जाता हूँ , ना रोता ना चिल्लाता हूँ !
चुपचाप  मैं  माँ के  कमरे में , जा माँ को खूब हँसाता हूँ !

माँ हँसती भी  है , कहती भी है , साथ वो हर पल है मेरे,
सब जान  ये माँ  कैसे लेती , मै कभी समझ न पाता हूँ !

इक जादू ही तो है , सर पे , जब हाथ मेरी माँ रखती है ,
दुःख  छू मंतर हो जाते  हैं , इक  बच्चे सा बन जाता हूँ !

मेरी खुशियों को ,सपनों को ,वो अपना लक्ष्य बना लेती,
माँ  मेरी  मुझे  बताती  है , मैं खुद का भाग्य विधाता हूँ !

बीबी - बच्चे सब यार -दोस्त, पूछा करतें हैं घुमा-फिरा,
माँ ने अब तक पूछा ही नहीं ,मैं कितना रोज कमाता हूँ !

सोमवार, 3 फ़रवरी 2014

tanu thadani ये ही जीवन है तनु थदानी


किसी जलसे में मिलना फिर बिछड़ना , ये ही जीवन है !
किसी  के  दिल  के  कोने  में  ठहरना , ये ही जीवन है !

मुझे  मालूम  है  गढ्ढे   मिलेंगे  ,  राह   में   अक्सर  ,
मुझे  है  प्यार  से  गढ्ढों को  भरना , ये ही जीवन  है  !

बने  तो  वृक्ष  फूलों  का , सभी  को  छाँव  भी  तो दें  ,
महकना  अंततः  फूलों  सा  झड़ना , ये  ही  जीवन है !

हाँ ! मेरी  माँ  ने  मेरे  नाम  की , तस्वीर   रच  डाली ,
अब  मेरा  काम  उनमें  रंग  भरना , ये  ही  जीवन  है !

जिन्होंने  गोद  में हमको  खिलाया , वो हैं अब  बेबस,
उन्हें  बच्चों  के  भाँति  प्यार  करना , ये ही  जीवन है !