शनिवार, 1 मार्च 2014

tanu thadani मौसम वोट का क्यूँ आया तनु थदानी

आँखें सपने भर लायी !
नेताओं ने लोरी गायी !

देश लुटा चप्पे - चप्पे ,
कौन  करेगा  भरपाई  ?

लाभ हानि ही पढ़ा लिखा,
फिर अपनी आयु खायी !

इज्जत केवल रस्म बनी ,
ये कैसी कालिख छायी ?

बोयी थी खामोशी फिर,
चींखे कैसे उग आयी ?

मौसम वोट का क्यूँ आया ?
गली गली है घबरायी !!

गुरुवार, 27 फ़रवरी 2014

tanu thadani. तनु थदानी चाहे मैं हिन्दू मुस्लिम तुम

तुम इत्र लगाओ हम कुमकुम  !
इक  जैसे ही तो हैं हम - तुम  !

हम  रोते  भी  तो इक  सा हैं ,
चाहे  मैं  हिन्दू  मुस्लिम  तुम  !

हंसते  हैं  हंसी भी इक जैसी ,
मरते   हैं  तो  हो  जाते  गुम  !

बुद्धु  हैं  तभी   तो शासक  ने,
माना  हमको बस एक हुजुम !

जब शक्ल  हमारी  इंसा  सी ,
आदत से क्यूँ  कुत्ते की दुम  !





मंगलवार, 25 फ़रवरी 2014

tanu thadani हम इतने तन्हा बैठे हैं तनु थदानी


मत पूछ क्यूँ उकड़ू लेटे हैं !
दीवाल ने  कमरे  फेंटे  हैं !

ग़ज़लें मेरी मेरे दुःख का ,
पूरा  संसार  समेटे  है !

उकताई  यूं  अब  तन्हाई,
खामोशी  लिये  लपेटे  है !

हर मिनट की साँसे गिनते हैं ,
हम  इतने  तन्हा  बैठे  हैं  !

मेरे घर बीच दीवाल  उठी ,
क्यूँ  कि  मेरे  दो  बेटे  हैं !

शनिवार, 22 फ़रवरी 2014

tanu thadani माँ ने अब तक पूछा ही नहीं तनु थदानी


माँ ने अब तक पूछा ही नहीं
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दुःख से जब मैं घिर जाता हूँ , ना रोता ना चिल्लाता हूँ !
चुपचाप  मैं  माँ के  कमरे में , जा माँ को खूब हँसाता हूँ !

माँ हँसती भी  है , कहती भी है , साथ वो हर पल है मेरे,
सब जान  ये माँ  कैसे लेती , मै कभी समझ न पाता हूँ !

इक जादू ही तो है , सर पे , जब हाथ मेरी माँ रखती है ,
दुःख  छू मंतर हो जाते  हैं , इक  बच्चे सा बन जाता हूँ !

मेरी खुशियों को ,सपनों को ,वो अपना लक्ष्य बना लेती,
माँ  मेरी  मुझे  बताती  है , मैं खुद का भाग्य विधाता हूँ !

बीबी - बच्चे सब यार -दोस्त, पूछा करतें हैं घुमा-फिरा,
माँ ने अब तक पूछा ही नहीं ,मैं कितना रोज कमाता हूँ !

सोमवार, 3 फ़रवरी 2014

tanu thadani ये ही जीवन है तनु थदानी


किसी जलसे में मिलना फिर बिछड़ना , ये ही जीवन है !
किसी  के  दिल  के  कोने  में  ठहरना , ये ही जीवन है !

मुझे  मालूम  है  गढ्ढे   मिलेंगे  ,  राह   में   अक्सर  ,
मुझे  है  प्यार  से  गढ्ढों को  भरना , ये ही जीवन  है  !

बने  तो  वृक्ष  फूलों  का , सभी  को  छाँव  भी  तो दें  ,
महकना  अंततः  फूलों  सा  झड़ना , ये  ही  जीवन है !

हाँ ! मेरी  माँ  ने  मेरे  नाम  की , तस्वीर   रच  डाली ,
अब  मेरा  काम  उनमें  रंग  भरना , ये  ही  जीवन  है !

जिन्होंने  गोद  में हमको  खिलाया , वो हैं अब  बेबस,
उन्हें  बच्चों  के  भाँति  प्यार  करना , ये ही  जीवन है !

बुधवार, 22 जनवरी 2014

tanu thadani ये गजब हुआ तनु थदानी

वो घर था जिसमें मेरा , वो मकान पी गई! 
इज्जत भरे बाजार,  छान - छान पी गई! 
   

पीते पिलाते थे जिसे, सम्मान समझ कर,
बोतल वो मेरी मेरा ही, सम्मान पी गई! 


छोटी खुशी समझ के जिसे, घर में लाया था ,
बेटी की खुशी बीबी की वो , जान पी गई! 

टोपी बड़ी थी सर पे मगर, ये गजब हुआ, 
छोटी सी बोतल पूरी , आन -बान पी गई! 

ठेका था लोग  पीते थे, इक दिन पता चला ,
पूरा मुहल्ला मुई  वो, दुकान पी गई  !

शुक्रवार, 10 जनवरी 2014

tanu thadani मेरी मां खुश हो जाती है तनु थदानी



जी हां ! मैं दोस्त बनाता हूं , तभी तो धोखे खाता हूं !
मैं  बुद्धु  बन  के हूं रहता , तभी तो सबको भाता  हूं !

किसी ने अपनापन लूटा , किसी ने अंतस को  लूटा ,
नहीं कुछ घटता रत्ती भर, मैं चाहे  लुट लुट जाता हूं !

किसी के अपने ही बच्चे,छिटक के बिदक के हैं रहते,
वो बच्चे साथ थे मेरे ,क्यूँ कि मैं ,बच्चा बन पाता हूं !

किसी का हाथ मिलाना,गले लगाना,झेल चुका हूं सब,
कभी हमदर्दी मत रखना,समझ मैं सब कुछ जाता हूं !

यहाँ सब खोद के खाई, खुद ही गिरते , रोते हैं रहते,
गिरे गढ्ढे में इक इक कर,  मैं चाहे लाख बताता हूं !

यहाँ पे प्रेम का मतलब,आलिंगन व चुंबन बिस्तर है ,
तभी तो लोग हैं हँसते मुझ पे,मैं तो कृष्ण पढ़ाता हूं !

अरे ईश्वर  ! न  तू इतरा , मैं  तेरे खातिर ना आता ,
मेरी मां खुश  हो जाती है , तभी तो मन्दिर आता हूं !