गुरुवार, 19 दिसंबर 2013

tanu thadani चल दुःख दे दे मुझको अपने तनु थदानी

दुःख जाग रहा गजलों में अब, मैं सोया किस्मत सिरहाने !
दिल ने खुद  पे  ले  ली  बातें , अब क्या होगा मौला जाने !

ये  पीठ  पे  घाव  हुआ  कैसे ,कैसे  किस  पे  इल्जाम  रखुं ?
सब ही  तो हंस के  मिलें गले , कैसे  बोलो अब पहचाने ?

मां तेरी प्यार की  लोरी  सा ,मासूम वो लम्हा  ना मिलता ,
अब  मिलते  हैं  हर  ओर  यहाँ , बस छल के ही ताने -बाने !

हम अपनी अपनी गठरी में , दुःख  लाख लिये फिरते रहते ,
हर दर पे गठरी खोल खोल,  लगते हर इक को दिखलाने !

चल  दुःख  दे  दे मुझको अपने , पर शर्त माननी होगी कि ,
तुझसे   भी  दुःख  न पाये कोई,  चाहे जाने  या अनजाने !

बुधवार, 18 दिसंबर 2013

tanu thadani मैं सूफीयाना हो गया तनु थदानी

कंगाल था , इक नाम से ही ,इक खजाना हो गया !
तुझको  बना  मालिक मैं , बुद्धु से सयाना हो गया !

हाथों  को  उठा  माँगते , सिर  फोड़ते  हर  द्वार पे ,
सब ही तो है फिर ये तो खुद पे ,जुल्म ढाना हो गया !

मैं  मिला  मां  को , मुझे बीबी मिली,  बच्चा मिला ,
सब कह रहे जब तू मिला , तो मैं दीवाना हो गया !

सब  ढुंढ रहे  हैं  तुझे , काशी  से ले अजमेर तक,
अब खुद के भीतर ही गये ,जब इक जमाना हो गया !

जब मैं रहा मैं ही नहीं,फिर दुःख है क्या ओं दर्द क्या?
इस पार से उस पार बस, ये आना -जाना हो गया !

धर्मों की पकड़ से निकल, कोशिश की इंसा होने की
इंसान  ज्यूं  बनता गया , मैं सूफीयाना  हो गया !

तेरी  खुशी  में  गा  रहा  मैं , संग  मेरे  गा  जरा ,  
रोया दुःख में  तु मेरे ,   यूं  सुर  मिलाना हो गया !

सोमवार, 4 नवंबर 2013

tanu thadani ऐ भारत मां

उसे  नेता  क्यूं कहते हो , क्यो  भूले अपने  छालों   को  ?
हमारे  हाथो ही  दे  मारा है  , हमारे  गालों   को  !


यही  कुनबा  है बेशर्मो  का , जिसने  मां  को  ही  लूटा ,
पहन खादी यहाँ सहलाते , लफंगो सा  बालों को !


सलामत हैँ सभी संदर्भ,  जिसकी आड़ ले ले कर,
वो  लेता  छीन  मेरे  भूखे , बच्चो के निवालो  को !

उसे  ठग कहने   वाले , हैं  गलत  ये मैं भी कहता  हूं ,
हैं वो  कातिल कतल करता , हमारे  भोले भालो  को !

समूचे  घर  की सम्पति को वो , घुन  बन के खा  गये ,
कि हम तो  देखते ही  रह  गये , बस  लटके  तालो को !

वो अपनी आत्मा को बेच  के भी , फिर रहें  भूखे ,
वो  बेचेगें  जरूर देखना , अब  अपनी खालों  को !

ऐ भारत मां ! हम ही ने चोर,  संसद मे बिठाये हैं ,
जो  सीना ठोक के अंजाम,  देते  हैं  घोटालों  को !

कि  संसद जब  हमारी भोर  का कानून  इक देगी ,
पियेगें भर के  तब उस भोर में , जीवन  के प्यालों को !

रविवार, 22 सितंबर 2013

tanu thadani तुम भी तो संत हो hey eshwar-3 tum bhi to sant ho हे ईश्वर -3 तनु थदानी

हाँ !  दिल के  कूड़ेदान  से  भी ,छांटता  हूँ  प्रेम !
तू  विष  परोस  तो  बदल  के  ,चाटता   हूँ  प्रेम !

मुझसे  नहीं   डरो  मैं  कुछ  भी , मांगता  नहीं  ,
मैं  तो  हूँ   इक  फ़क़ीर  सदा , बांटता  हूँ   प्रेम  !

तू  खेती  नफरतों  की  भले , कर  के  देख   ले  ,
तेरे   ही  खेत   आ  के  देख , काटता  हूँ   प्रेम  !

जब  गिर  पड़ो  गड्ढ़े  में  तो , मुझको पुकारना ,
मैं   वासना   के  गड्ढ़ों   में  ,पाटता   हूँ    प्रेम  !

बदरंग   दीवारों   को   कभी ,   छोड़ता    नहीं , 
अच्छी   लगे   दीवार  सो  मैं , साटता  हूँ  प्रेम  !

तुम  भी तो  संत हो अगर ,दाढ़ी  नहीं तो  क्या ?
खुल  के  कहो  की  नेक  हूँ औं , बांटता  हूँ प्रेम !

 



सोमवार, 19 अगस्त 2013

tanu thadani हम चुप ही रहते हैं hey eshwar -3तनु थदानी ham chup hi rahte hain हे ईश्वर-3

भली  आदत  थी  वो  मेरी , वो  आँखे  बंद  रखने  की !
सबों से  कट  गया  मैं जब  लगी , आदत  परखने  की !

खफ़ा थे लोग उनकी  शक्ल  जो ,उनको  ही दिखलायी ,
गलत  आदत  थी  वो  मेरी , आईना  साथ  रखने  की !

सदा   सच  बोलना  बेटा , मगर   बेटे  ने   समझाया ,
बुरी  आदत  है  ये  मेरी , यही   इक  बात  बकने  की !

अब  रोयें  या  कहो  हँस दे ,हमें  भत्ता  तो मिलता है ,
हमें   सरकार  ने   दी   नौकरी , है   धूल  फँकने  की !

या  कोई  मार  दे  या  गाली  दे , हम चुप  ही रहते  हैं ,
कहानी   है  पुरानी   जोश  औं , जज्बे   फड़कने  की !

हमारा  दोष  ही  कह  लो ,कि  हम  विश्वास  हैं करते ,
छकाते  सुख  हमें  क्यूँ  कि,हमें आदत  है छकने की !

रविवार, 11 अगस्त 2013

तुमको नहीं पता है ,चुपचाप रोती माँ है hey eshwar-3 (tanu thadani) हे ईश्वर -3 { तनु थदानी }

रूठे  हुए  हैं  हमसे ,खुशियों  के ताने- बाने !
परदेस  में  न  मिलते ,परिवार  के  खजाने !

जीने के लिए  तुमने,जो अपनी जमीं छोड़ी ,
ज़िंदा  नहीं तू  बिलकुल ,साँसे  तो हैं बहाने !

छाया  तो पकड़ लेगा,कोई गणित  लगा के , 
खुद  को  पकड़ने में ही,लग जायेगें ज़माने ! 

बहनों का मीठा  ताना,भाई का रूठ  जाना ,
वो  जा  रहें  हैं  देखो , यादों  में ही समाने !

कितने  भी  तर्क गढ़ ले ,निष्कर्ष तो यही है ,
घर  में  थी दाल-रोटी,बाहर भी वो ही दाने ! 


तुमको नहीं पता   है ,चुपचाप  रोती माँ  है , 
दुःख ढेर सारे होंगे ,क्या बोला कभी माँ  ने ? 

समझे थे जिसको दौलत,ढूंढा शहर-शहर में ,
क़दमों में मिले माँ के ,जीवन के पल सुहाने ! 

बिटिया का चंचल बचपन,न हाट में मिलेगा ,
लौटेगा जब  तलक तू ,वो  भूलेगी  तुतलाने !

जाना  तो कब्र  तक  है ,दौड़ो यहाँ-वहां तुम,
आएगी अकल कब तक,अब ये तो राम जाने ! 






    
    

  

बुधवार, 7 अगस्त 2013

अवाक से हम रह गयें hey eshwar-3 (tanu thadani) हे ईश्वर -3 { तनु थदानी }awaak se ham rah gayen

हो सीमा या हो खेत  अब ,मरने का  समां हो गया  !
क्यूँ  भारतीयता  का  हमें , अवैध  गुमां  हो  गया  ?

निराश   हूँ   यूँ   कि   यहाँ  ,  इक   भारतीय  नहीं  ,
सिख - मुसलमा -हिंदू  जैसा , खूब  जमा  हो  गया  !

अब   आदमी   के  बारे   में  , बोले  तो   क्या  बोले ,
जब  राम  हिन्दू   हो  गया ,ख़ुदा  मुसलमा हो गया !

कुत्तों   से   सीखा   भौंकना  ,  सीखी   नहीं   वफ़ा  ,
वो  देश  के  हैं  नेता  जी ,सो उनको  क्षमा  हो  गया !

औकात   की   तो   बात   न  , करना   कभी  पगले ,
भारत  समूचा  आजकल ,इंडिया  में  रमा  हो  गया !

रुपया   नहीं   गिरता  कभी , गिरता   हमारा  मोल  ,
न  पूछ  यहाँ  दर्द  की  , कैंसर  को  दमा  हो  गया !

संसद   हमारी   भर  गयी  , गिरगिट   से  अचानक  ,
अवाक से  हम  रह  गयें ,सब  कुछ  यूँ  थमा हो गया !