मंगलवार, 7 मई 2013

न बनाना बुद्ध खुद को hey eshwar-3 (tanu thadani) हे ईश्वर -3 { तनु थदानी },

प्रार्थनायें  हैं  जरुरी ,  काम  लेकिन ना  करें  क्यूँ  ? 
उम्र  वाली  बाल्टियां  ,हम  निरर्थक  यूँ  भरें  क्यूँ  ?

न  बनाना  बुद्ध  खुद  को ,घर  कभी  न  छोड़ना तू ,
ध्यान  में असंख्य गढ्ढे ,ये बताओ गिर  पड़े  क्यूँ ?

हारना  व  जीतना  तो , जिन्दगी   के  रंग  हैं  जी ,
रह गया अफ़सोस ये की,हारे आखिर बिन लड़े क्यूँ ? 

प्यार  का सन्देश ले कर , मैं  यूँ  ही  फिरता रहा कि ,
मौत निश्चित है तो आखिर,प्यार ही से ना मरे क्यूँ ?  







शनिवार, 4 मई 2013

चलो जगाओ खुद कोtanu thadaniहे ईश्वर -3 तनु थदानी





ग़ज़ल 
----------------------------------------------------------------
हमने  सारा  शहर  बसाया ,बिल्डिंग - नाले - रोड  बनायें  !
मगर  प्रश्न  ये  रहा  अधूरा , आम  आदमी  कैसे   खाये  ? 

जंगल ने दी कुर्बानी , फिर  हम  क्यूँ   जंगली  बन बैठे  हैं ,
कॉलोनी  ने  खेत  चबायें  , कैसे  शहर  की   भूख  मिटायें ?

सीमाओं  की हलचल  से  है , हमें  भला  क्या  लेना - देना ,
हमें  हमारी  नींद  है  प्यारी , बेशक  कोई  आये-  जाये  !

किस्मत  से मानव तन पाया,किस्मत  से ये देश भी पाया ,
सब  पा जाते किस्मत से फिर,मेहनत से क्यूँ काम  बनायें ?

कहते  हैं  भगवान  मिलेगा , इसीलिये  हर गली-गली  में ,
कोई   घंटा   बजा  रहा  है , कोई  ख़ुदा - ख़ुदा  चिल्लाये  !

ज्यों ये घोषित किया की कुछ भी ,बिना परिश्रम नहीं मिलेगा ,
धर्म   के  ठेकेदारों  को ये , फूटी  आँख  सा जरा  ना  भाये !

चलो जगाओ खुद को ,आँखे , खोल  के  देखो  सपने  सारे ,
फल  हेतु  ही  कार्य  को  करना , गीता  का  अध्याय  बनायें !











गुरुवार, 2 मई 2013

सचमुच हम शर्मिंदा हैं hey eshwar-3 (tanu thadani) हे ईश्वर -3 { तनु थदानी }

खुश  ना  होना  जश्न  देख  कर,अक्सर  मौका  आता  है  !
मेरे  देश  में  गम  अक्सर  यूँ   , भेष  बदल   भरमाता  है !

बहरूपियों  की  एक  सल्तनत , राज  करे  हम लोगों  पे ,
मीठी  बातें   करता  है  फिर , अपनी   थूक  चटाता  है !

सचमुच  हम  शर्मिंदा  हैं , ऐ  सरबजीत  ये  सच  भी है ,
कि  राजनीति  का मारा  पानी ,मांग  भी तो ना पाता  है !

जो  संसद  को  चकला  बोला , सीधा  जेल  में  जायेगा ,
बोल  के  पगला  पगले  को क्यूँ ,मुहँ  अपना नुचवाता  है !

मेरे  प्यारे  भारत  का अब , और  बुरा  भी  क्या  होगा ?
संविधान  की  आड़ में  कुत्ता , शेरों  को नचवाता  है !

हे  ईश्वर ! अब  इंसानों  को  ,तू  ही आ  कर  ये  समझा ,
विदा  जो  होगा  दुनियां से तब , ले  कर क्या जा पाता  है ?? 

  

सोमवार, 29 अप्रैल 2013

तू रब है मैं तेरा आशिक hey eshwar-3 (tanu thadani) हे ईश्वर -3 { तनु थदानी }

तू  रब  है  मैं  तेरा  आशिक
-------------------------------
हाँ ! तुम को पा ही लेता मैं ,जो तुम में ,खो अगर जाता  !
तुम्हे  पाने  का  सपना  टूटता , जो  सो  अगर  जाता  !

तेरी  मदमस्त  प्रकृति  भी  तब,  खुशहाल  हो  पाती ,
हमारे  दिल  में  संतुष्टि  का  पौधा,  बो  अगर  पाता ! 

मुझे  भी  खुश  कोई  करता  , कभी  मैं  भी  ख़ुशी  पाता ,
किसी  के  वास्ते   थोड़ी  ख़ुशी  मैं , जो  अगर  लाता  ! 

मेरे   दुःख  में  अकेला  मैं  था , कोई  साथ   तो  रोता ,
किसी  के  वास्ते  मैं  भी  कभी जो ,रो  अगर  पाता  !

तू  रब  है , मैं  तेरा  आशिक  , तू  ऐसा  चित्रकार  है  ,
तेरी  दुनियाँ   सा  मैं  भी  खूबसूरत , हो  अगर  पाता  !

बुधवार, 27 फ़रवरी 2013

tanu thadani तनु थदानी क्यूँ सूख गया यूं अचानक

साबित  किया  इक  सा  हमें , इस  लाल  रक्त ने!
हम  हैं अलग  फिर क्यूँ  कहा ,ईश्वर  के भक्त  ने?

अब्बा   की  मार   खा  रोया  ,  मासूम   वो बच्चा,
अल्लाह  की  फोटो  क्यूँ  बनाई ,उस  कमबख्त  ने !

उसने   भी  मार   खायी  थी ,  लक्ष्मी   बना  अंधी ,
तड़पाया   रोटी  के  लिये , जब   दोनों   वक्त  ने  !

मुल्ले   हो  या   पंडे   सभी , इक  थैली  के   चट्टे ,
चुगली  की उनकी ,उन्ही  के ,आसन  व  तख्त  ने !

क्यूँ   सूख  गया  यूं  अचानक  ,मैं  तेरे  भीतर  ?
हो   कर दुखी  मुझसे  कहा ,  दिल  के  दरख्त  ने !



मंगलवार, 26 फ़रवरी 2013

चलो हैं दोस्ती सिलते hey eshwar-3 (tanu thadani) हे ईश्वर -3 { तनु थदानी }

चला जो  दौर  बिकने  का , न  सोचा  पीछा  ना  आगा !
बिके  सब  दोस्त  ना जाने ,वो  कैसा  हाट   था  लागा  !

बुरा  था  वक्त  जिसने  चिथड़े , कर  डाले  रिश्तों  के ,

चलो   हैं  दोस्ती   सिलते ,  लाओ  यकीन  का  धागा  !

जो  कर  दी  मेरे  दिल पे  छापेमारी , मेरे   ही सिर  ने ,

खजाना  दोस्ती   का  था , जिसे  वो  लूट  कर  भागा  !

बिगाड़ा  है  हमारा  कल , हमीं  ने  खुद  यहाँ  लेकिन  ,

हमारी  छत  पे  सदियों  से , रहा   बदनाम  है  कागा  !

वो हमसे प्यार है करता hey eshwar-3 (tanu thadani) हे ईश्वर -3 { तनु थदानी },

कोई   भी  बुत  मेरे  साहेब  को , ना  साकार  कर   पाये  !
मुझे    तो  जर्रे- जर्रे   में   , मेरा  साहेब   नजर    आये  !

न  हमसे   पूछ  कैसे   खुद को   ही , हम  नोंच  खाते  हैं ,
धरम  का  मांस  हम में   भूख , आदम  वाली  ललचाये !

बना  मंदिर , बना   मस्जिद ,जो  करते   चापलूसी  हम ,
मेरा  साहेब  हमारी  अक्ल  पे , हँस - हँस   के मुस्काये !

भला   कोई  पिता  क्यूँ  चाहेगा  कि  , उसका  ही  बच्चा ,
करम  को  छोड़ - छाड़  कर , पिता  के  गुण  भला   गाये  !

किया   जीवन  को  ही  पैदा  ,मगर  मस्ती    नहीं  पायी ,
ना अब तक सम  हुये  हम सब ,ना  खुद को भोग ही पाये !

मेरे  साहेब  ने  हम  सबको  बताओ , क्यूँ   यहाँ  भेजा  ?
भला  क्या  इसलिये  कि सारी  बगिया  ख़ाक  कर  जायें !

वो  हमसे  प्यार  है  करता ,वो  सब तक  आ  नहीं  पाता , 
तभी  तो  माँ  बनाई  ताकि , हर  इक  तक  पहुँच  पाये  !