मंगलवार, 26 फ़रवरी 2013

चलो हैं दोस्ती सिलते hey eshwar-3 (tanu thadani) हे ईश्वर -3 { तनु थदानी }

चला जो  दौर  बिकने  का , न  सोचा  पीछा  ना  आगा !
बिके  सब  दोस्त  ना जाने ,वो  कैसा  हाट   था  लागा  !

बुरा  था  वक्त  जिसने  चिथड़े , कर  डाले  रिश्तों  के ,

चलो   हैं  दोस्ती   सिलते ,  लाओ  यकीन  का  धागा  !

जो  कर  दी  मेरे  दिल पे  छापेमारी , मेरे   ही सिर  ने ,

खजाना  दोस्ती   का  था , जिसे  वो  लूट  कर  भागा  !

बिगाड़ा  है  हमारा  कल , हमीं  ने  खुद  यहाँ  लेकिन  ,

हमारी  छत  पे  सदियों  से , रहा   बदनाम  है  कागा  !

वो हमसे प्यार है करता hey eshwar-3 (tanu thadani) हे ईश्वर -3 { तनु थदानी },

कोई   भी  बुत  मेरे  साहेब  को , ना  साकार  कर   पाये  !
मुझे    तो  जर्रे- जर्रे   में   , मेरा  साहेब   नजर    आये  !

न  हमसे   पूछ  कैसे   खुद को   ही , हम  नोंच  खाते  हैं ,
धरम  का  मांस  हम में   भूख , आदम  वाली  ललचाये !

बना  मंदिर , बना   मस्जिद ,जो  करते   चापलूसी  हम ,
मेरा  साहेब  हमारी  अक्ल  पे , हँस - हँस   के मुस्काये !

भला   कोई  पिता  क्यूँ  चाहेगा  कि  , उसका  ही  बच्चा ,
करम  को  छोड़ - छाड़  कर , पिता  के  गुण  भला   गाये  !

किया   जीवन  को  ही  पैदा  ,मगर  मस्ती    नहीं  पायी ,
ना अब तक सम  हुये  हम सब ,ना  खुद को भोग ही पाये !

मेरे  साहेब  ने  हम  सबको  बताओ , क्यूँ   यहाँ  भेजा  ?
भला  क्या  इसलिये  कि सारी  बगिया  ख़ाक  कर  जायें !

वो  हमसे  प्यार  है  करता ,वो  सब तक  आ  नहीं  पाता , 
तभी  तो  माँ  बनाई  ताकि , हर  इक  तक  पहुँच  पाये  !





बुधवार, 30 जनवरी 2013

आखिर क्यूँ ? {हे ईश्वर -3 } तनु थदानी tanu thadani


शातिर  दिमाग  से  खेलते  हैं ,
नादान   दिल  से  खेलते   हैं ,
बेवकूफ  शरीर  से  खेलते  हैं ,
हम  खुद  के  भीतर  भी
इन  तीनो  स्थितियों  को
अपनी  मृत्यु  तक  झेलते  है !


हम  नहीं  हैं  किसी  भी  पशु  के  विकास - यात्रा  के  यात्री
हमने  खुद  के  भीतर   पशुता का  विकास  किया  है !
बेहतर हैं  पशु  हमसे
कि स्पष्ट  है  उनका लक्ष्य -भोजन ,
मगर  हमारे  लक्ष्य तक  नहीं  हैं  निश्चित !


हम  कपड़े  ओढ़  कर  शर्मिन्दा  हैं ,
मृत  भावनाओं  के  साथ  ज़िंदा  हैं ,
भीड़  मे  अकेलेपन  के  साथ  हैं ,
अकेलेपन  में  यादों  से  खेलते  हैं !
मात्र  साँसों  से  दोस्ती  के  लिये ,
रोज नया  आवरण , खुद  के  ऊपर  बेलते  हैं !


हे  ईश्वर  !
क्यूँ  है  हमारी  जीवन - यात्रा   अनिश्चित  ?
क्यूँ   हमारे  साथ   चलती  एक  निन्दा  है ?
क्यूँ  हैं  बनाते खुद  के  भीतर  खाई  अहंकार  की ?
आखिर   क्यूँ   खुद  ही  को  उसके  भीतर  ढकेलते  हैं ??  

रविवार, 9 दिसंबर 2012

जिन्दगी hey eshwar-3 (tanu thadani) हे ईश्वर -3 { तनु थदानी }



मिली   तभी  से  सर  पे  मेरे , मौत की चुनरी  रही ओढ़ती !
वही  जिन्दगी   संग  रही  ओं  , रिश्ते -  नाते  रही  जोड़ती ! 

खुशियों  वाली  चादर  खुद पे , मैंने  तह  कर  के रक्खी थी ,
काश ! जिन्दगी  उस  चादर  को , नहीं छेड़ती ,नहीं मोड़ती !

जिसको अपना  मान के  भीतर , पाल  रहा  था मैं  दीवाना ,
वही  जिन्दगी  मेरी   उम्र   के , घर   के   ईटे   रही  तोड़ती  !

पूरे   ही  सम्मान  से  लेना ,  देती  जो   भी  यहाँ  जिन्दगी ,
लेने  पर  जो  आ  जाये  तो ,  साँसे   तक भी  नहीं  छोड़ती ! 

शुक्रवार, 7 दिसंबर 2012

बस एक निवेदन है hey eshwar-3 (tanu thadani) हे ईश्वर -3 (तनु थदानी )

असंभव   होती  हमारी  जागरूकता 
हमारी   नीयत    के खोखलेपन  का  सबूत  है !

कुकुरमुत्ते   की  मानिंद  उगी  टोपियों  की  जड़ 
यकानक  राजनीतिक   क्यूँ हो   गई ?
हमारे  बच्चे  की  भूख  तो  सामाजिक   थी ना 
फिर  क्यूँ  बन  गई  नारा ?
अनशन  हुयें  , हड़ताल  हुई  ,समझौते  हुये ,
खिलाड़ी  अपने   खेल से  पुर्णतः  संतुष्ट  थें कि 
किसने   किसका  खेल  बिगाड़ा !

कल   फिर  वोटिंग  होगी 
नहीं मालूम  कौन  जीतेगा ,
पर मालूम   है  की  हमारी   हार होगी !

खूब    घूमते  हो  ना ,
कभी  खुद  के  पासपोर्ट  पर 
अपने  दिल  का  वीजा  लो 
पूरी यात्रा  में  निः शुल्क  है  आना- जाना 
बस  एक  निवेदन  है -
यात्रा  में   अगर  भारत  नजर  आये  
तो  उसे  जरुर   बाहर  लाना !!  

चलो दूरियों से एक समझौता करते हैं hey eshwar-3 (tanu thadani) हे ईश्वर -3 { तनु थदानी }


हमने  बड़े  करीने  से  
सजा  रखी  हैं  अपनी  दूरियाँ !

कभी आत्ममुग्धता  की  छत  पे 
अकेले  बैठे लाखों - करोड़ों  तारों  को  देखते  हैं 
कभी नीचे  आ लाखों - करोड़ों  के  हुजूम के जश्न   में  हो जाते  है  शामिल 
लेकिन  कोई  नहीं  होता  किसी  के  साथ !

दिल से  निः हत्थे  हम 
हँसते  - रोते  हैं  नाप - तौल  कर ,
 क्या कोई   बता  पायेगा  कि   जाना  कहाँ  है ??

दोमुहें  पैजामे  को  तर्कों  की  डोरी  से  बाँध 
पूरी  करते  हैं  जीवन-  यात्रा !
मुहावरे  सा  व्यक्तित्व  ले  कर  जीते  है 
छोड़  जाते  हैं  दुनिया  से  विदा   होने से  पहले 
अनबूझे  अक्षरों  पे  किस्म-किस्म  की  मात्रा !

चलो  दूरियों  से  एक  समझौता  करते  हैं -
सर्वप्रथम  मैं  को  मारते  हैं  फिर  हम  मरते  हैं !
समय  की  बलिष्ठ  भुजाओं के  आलिंगन  से  मुक्त 
इक दूजे  का  हाथ  थाम  चलने  की कोशिश  करते  है  !

प्रिय !  हम  अब  भी  जीते  हैं 
तब भी  जीयेगे ,
इक दूजे  की  साँसों  में  ही  हो  जायेगे  अमर 
जब  खुद  ही  खुद  की  दूरियों  को  पीयेगें !!   


 


गुरुवार, 6 दिसंबर 2012

बिंब hey eshwar-3 (tanu thadani) हे ईश्वर -3 { तनु थदानी }


आज  सुबह   से  ही  परेशान   हूँ  मैं ,
अपनी  अजन्मी  कविता में  बिंब को ले कर !

पुरानी  चप्पलों  को  बिंब   बनाया  नेताओं  का 
घूर  पड़ी  सारी  पुरानी   चप्पलें  घर  की -
क्या   तकलीफ   दी  हमने   आपके  पैरों  को  ??
बूढी  हैं , पुरानी  हैं , मगर   काटती  तो  नहीं  हैं  आपको !

खोटे  सिक्कों  को  टटोला 
खनक  पड़ें 
बोले - मत  बनाना  हमें  बिंब   इन  नेताओं  का 
हमारा  यूँ  तो  कोई  मोल  नहीं 
मगर  वज़न  कर  के  बेचोगे  तो  इन  नेताओं  से  अधिक   ही पाओगे !

यहाँ  तक  की  रद्दी  अखबारों  ने   भी मना   किया  मुझे 
कहा- नाम  रद्दी  है  हमारा 
खबरदार ! जो नेताओं  से  तुलना  की,
हम  बिकते  जरुर  है  मगर  राष्ट्र -हित  में 
वापस  आतें  हैं  नए  रूप  में !

घर  के  कुत्ते  ने  मासूमियत  से  कहा -
हमने  तो   आपका नमक   खाया  है  मालिक 
नहीं  बनाना  बिंब   हमें  नेताओं  का   
हमने  कभी  कोई  नहीं  की  गद्दारी 
युगों  का   देख  लो  इतिहास
हमारी  वफादारी  में कभी  कोई   कमी नहीं  आई ,
अगर  हमारे  जैसे  भी  होते ये  नेता  
तो  घुस  नहीं  पाती  हमारे  घर  में  एफ  डी  आई !!