बुधवार, 5 दिसंबर 2012

अब भी दो कौड़ी के नेता hey eshwar-3 (tanu thadani) हे ईश्वर -3 { तनु थदानी },


हाथ  जोड़  कर घर - घर जा  कर , वोट  मांगता   वादा  देता !
कपड़े   तेरे    खोल  ये  देगा , अगर   नहीं  तू  अब  भी  चेता  !

बचपन  में   थी  सुनी  कहानी ,दाना - जाल  - शिकारी  वाली ,
लेकिन है  अफ़सोस  की  उससे ,कोई  अब  भी सीख  न लेता ! 

हाट   हमारे  , फल   भी  अपने  , बेचेगें  अब    बाहर   वाले ,
रोयेगा   उपजाने  वाला  ,   और   लुटेगा   यहाँ   पे    क्रेता !

महंगाई   है , महंगाई   में ,  एक   चीज़   ही   रही  अछूती ,
कल  भी  दो  कौड़ी  के  थे तो ,अब  भी  दो  कौड़ी  के  नेता !
      

मंगलवार, 4 दिसंबर 2012

धूप को तो आलिंगन में रखना था hey eshwar-3 (tanu thadani) हे ईश्वर -3 { तनु थदानी }



तुम  तो   धूप   थी  जाड़े  की 
जिसको  मैंने  प्यार  से 
पकड़  रखा  था   अपनी दोनों  हथेलियों  के  बीच !

जो  हमसे  बड़े  थे 
सभी  हँसे  थे 
कि  धूप   तो  हथेलियों  में  भरी  नजर   आती  है
अंततः  फिसल   जाती  है !

नहीं  फिसली  धूप,
उम्र  की  गर्मियों  में 
भरी  दोपहरी जब
हथेलियों  में  भरी  धूप  ने 
जला  डाला  मुझे 
तब लगा 
नहीं  है   वो  मेरी धूप 
ये  तो   कोई  और  है 
फिर  कहाँ  गई  वो   मीठी  धूप ??

कोई  नहीं   रोया  की  धूप  की  मिठास   खो गई 
गौर  से  देखा  जली   हथेलियों  को 
जहां  धूप  से  चिपक  मेरी  मुस्कान  सो  गई !

सच  कहूँ 
धूप   को  हथेलियों  में  पकड़ना   ही गलत  था 
धूप   को  तो   आलिंगन  में  रखना  था 
तभी  वो  मेरी   हो पाती 
जिस  दिन  धूप   मेरी   हो  जाती 
जलती तो  मेरे  ही  भीतर 
पर  मुझे  न  जला  पाती !!



  







    

सोमवार, 3 दिसंबर 2012

हे ईश्वर ! -{ तनु थदानी } hey eshwar-(tanu thadani)



कल  घूमते -घूमते  शहर  के एक  घर  से  जब  बात हुई 
तो  उसके  बंद  दरवाजे  ने   कुछ  राज यूँ  खोले -
चारपाई  को  ड्राईंग -रूम  से   हटा कर 
पीछे  बरामदे   में  रखना 
उतना   नहीं  था  दुखद  उसके  लिए 
जितना   दुखद  था   बाबूजी  का  अब उस  चारपाई  पर 
बरामदे  में  सोना !

सुविधानुसार  तर्क   भी बनाये  गये 
घरवालों  की तरफ  से 
कि 
ड्राईंग - रूम  के  हो-हल्ले  से  उन्हें    निजात मिली 
वहीँ  बरामदे  में  सटे  बाथरूम  होने  से 
उनकी दिनचर्या  में  सरलता  आयी !

फिर  उस  दरवाजे  ने 
मेरे कान  में   धीमे  से  बताया -
बेटा   बुरा  नहीं  है  इतना
वो तो  बाबूजी  ने   खुद  प्रस्ताव  रखा था 
नए  सोफे  की  जगह  बनाने  हेतु !

बाजू  वाले  दरवाजे  के   बारे में  बताया 
उसके   अन्दर  कमरे  तो  हैं 
मगर  नहीं  है  बरामदा ,
सो  उनके  बाबूजी आश्रम  में  रहतें  हैं !

बेटा  उनका भी  नहीं  है  बुरा 
कितना  ख्याल रखता  है  -
हर महीने  मिलने  जाता  है,
मिलने   वालों को   बताता  है -
घर  पे तो   कितने  अकेले  थे  बाबूजी 
वहाँ  तो  हमउम्र  की अच्छी  कंपनी  मिल गई ! 

मगर   अभी तक  यकीन  नहीं  आया  
कि  उस  बंद  दरवाजे   ने   मुझे  ये सब  बताया ...
हे  ईश्वर !  क्या  मेरे  बालों  में   आती  सफेदी  देख  ली  उसने ??
  






मंगलवार, 27 नवंबर 2012

यकीन मानो hey eshwar-3 (tanu thadani) हे ईश्वर -3 { तनु थदानी }



क्या   मैं  तुम्हारी  जिन्दगी  में 
शामिल   हूँ  मात्र   दिनचर्या   की  तरह ?

ऱोज   ही  पूजाघर  में  
साथ  होती हो  भक्ति  के  ,
रसोई   में  साथ  होती  हो   स्वाद  के  ,
बाहों   में  साथ  होती  हो  आसक्ति  के ,
मगर   इसमें   प्रेम  कहाँ   है  ??

आओ   हम दोनों  खोजें   मिल कर  
विश्वास  के  गर्भ  से   पैदा हुआ  प्रेम ,
जिसने   अभी   ठीक से   चलना   भी   नहीं   था सीखा ,
छोड़  दी  हम  दोनों  ने  उसकी  ऊँगली !


नहीं  मालूम  उस  नवजात  को  मर्यादा  की  चौहद्दी ,
गर्म  साँसों  के  कंटीले  जंगल   में  फंसे 
हम  अपने  प्रेम  की  कराह   सुन तो  सकते   हैं ,
मगर  नहीं  खोज  पा  रहे  उसके  अस्तित्व  को !


मेरा  विश्वास  है  वो  मिलेगा ,
जरुर मिलेगा !
मगर  मुझे  अपनी  दिनचर्या  से  मुक्त  करोगी  तब ,
मुझे  अपनी अँगुलियों  औं  हाथों  में 
एक   दास्ताने  की   तरह  पहनोगी  जब !

दसों  उँगलियों  सी पूर्णत :  मेरे   भीतर  आओगी ,
यकीन  मानो 
एक   भी  कांटा  नहीं  चुभेगा ,
और  तभी  प्रेम  को  खोज   पाओगी  !!

गुरुवार, 15 नवंबर 2012

मेरी कमाई माँ hey eshwar-3 (tanu thadani) हे ईश्वर -3 { तनु थदानी },



सब  पूछते   इस   उम्र  तक , कितना  लिया  कमा ?
मेहनत  की रोटी  घर  में  है , इज्ज़त  की  है  शमां  !


तुलना  तो   कभी   कर   नहीं ,  अपनी  इमारत   से ,
मैंने   तो   घर   बनाया   पर  ,  तूने   केवल   मकां !


जेबें  गरम , बिस्तर  नरम , फिर  छटपटाहट  क्यूँ ?
सुख   मिल  सके  सब  खोजते , ऐसी    कोई  दुकां !


मैं   संत   नहीं    हूँ   मगर  ,  ये   जानता    हूँ    मैं ,
सब  छोड़  कर  के  जाओगे , जो कुछ  किया  जमा !


गिन   भी   न    सका  कोई ,  मेरे  घर  की  कमाई ,
 मुझको   कमाया  माँ  ने  ओं , मेरी   कमाई   माँ !  


शनिवार, 3 नवंबर 2012

ऐसा क्यूँ नहीं कहते hey eshwar-3 (tanu thadani) हे ईश्वर -3 { तनु थदानी }


हमारे   "मैं "  के  पर्वत  से , रोजाना  हम   ही  तो  ढहते ! 
बताओ  अपनी "मैं " की जिद को, भला  क्यूँ  रहे सहते ?


हमें  जो - जो  पसंद   आता , वो हासिल  करने  को जीते ,
कि  जो  हासिल  है  उसके  साथ  ही , हम  क्यूँ नहीं रहते ?


कि  जब तुम  इक  ख़ुशी  पर , बार- बार  हंस  नहीं  पाते ,
बताओ  एक  ही  दुःख  पर   ,ये  आँसू  रोज  क्यूँ    बहते ?


तुम्हारे   साथ   माँ   रहती   है  , ऐसा   क्यूँ   जताते   हो  ?
क़ि  हम  सब  माँ  के  संग रहते  हैं,ऐसा क्यूँ नहीं कहते ??




गुरुवार, 1 नवंबर 2012

जब साजन रूठ जाता है hey eshwar-3 (tanu thadani) हे ईश्वर -3 { तनु थदानी }


हमारी  हो  ना  हो  मर्जी ,बहुत  कुछ  छूट  जाता है  !
हमारी  उम्र - शक्ल  को  ,समय  ही   लूट  जाता  है !


तुम्हारी   ज़िद   है   ओखली  ,  अहंकार   है  मूसल   
तुम्हारे  सामने  जो  तुमको , अक्सर  कूट  जाता  है!


कई  बरसों में  जतनों  से ,जो रिश्ता  ठोस  है बनता,
वही रिश्ता  महज   इक  बात  से  ही  टूट  जाता  है!


गले  मिलने  में  गंर संकोच  हो , तो  मुस्कुरा   देना , 
महज मुस्कान से शिकवा- गिला सब  फूट जाता है!


कहीं  मेहंदी  औ  चंदा  से भी , करवाचौथ  है होता 
सभी व्रत  व्यर्थ  हैं  होते ,जब साजन  रूठ  जाता है !
--------------------------- तनु थदानी