रविवार, 16 फ़रवरी 2025

नदी तो इक नजरिया है


हमारे पाप- पुण्य -कुम्भ, स्वीकारती झुक झुक !
नदी तो इक नजरिया है, कभी होती नहीं बे रुख !

नदी को उंगलियां होती, तो वो भी थाम के पेन्सिल,
लहर पे लिख रही होती, हमारा दुख, हमारा सुख !

बना के बाँध बाटे हैँ, नदी की धार काटे हैं 
नदी फिर भी बताती है,की चलता चल, कभी न रुक !

हमें आगाज करता है, ये रुतबा यूँ समर्पण का,
नदी का अनवरत सागर से मिलना, सदियों से बे चुक !
------------------------------   तनु थदानी





पूरी ही है अपनी ये जमीं,गंर जो प्यार है !

पूरी ही है अपनी ये जमीं,गंर जो प्यार है !
मिलने पे हो आंखों में नमी, गंर जो प्यार है !

धड़कन तेरी सांसे मेरी, ऐसा वजूद हो ,
दुनियां, वहीं पे हो थमी, गंर जो प्यार है !

गलती से भी गलती हमारे, बीच में न हो,
खोजे भी, निकले न कमी, गंर जो प्यार है!

बारिश में भी देखे गये,   पूरे लिहाज से ,
सांसों में गरम बर्फ जमी, गंर जो प्यार है !

नभ में, समुद्र में या, जमीं में कहीं पे भी,
खोदे, मिल जाये हम ही , गंर जो प्यार है !
---------------------  तनु थदानी




बुधवार, 22 जनवरी 2025

सास की बातों के मतलब भी ,

सास की बातों के मतलब भी ,एक से अधिक बताने दो!
बहु को अपने पढ़े लिखे का, होना भी दर्शाने दो !

सबकी सांसे अलग अलग हैं, इक दूजे से जुड़ कर भी,
परिवार के इस जादू को, बच्चों को अपनाने दो !
 
खाना खा जो यौवन पाया, यौवन बेच के खाना खाया,
जिस्म पेट की भूख से ऊपर, अपना जीवन आने दो !

खुश रहने का मतलब,ये नहीं होता,सब कुछ ठीक ही है, 
जनम तुम्हारा हुआ ये क्यूँ, ये जानों, बाकी जाने दो! 

लिख के पढ़ के,नौकर बन के,किस्तों में घर कार लिया, 
अपने बच्चों के सपनों को ,  बूढ़े न हो जाने दो !

सिल सिल के, बातों के सिलसिले, मकड़े सा बन जायेगा,
मन को मौन में डुबा के ऊपर, हल्के हो कर आने दो!
---------------------------  तनु थदानी

गुरुवार, 16 जनवरी 2025

तुम बस मुस्कुरा देना

इतनी उलझी है क्यूँ बे वजह, बताऊंगा !
जिंदगी मिल तो सही, मैं तुझे सुलझाऊंगा !

आंखों में तु,आंसू सी,झिलमिलाती है!
तुम्हारे बारे में, न झूठ बोल पाऊंगा !

शिकायतें जेब में रख, दर्द का आनंद लो,
 तुम्हारे दर्द में, पूरा ही मैं समाऊंगा !

कभी लगे जो तुमसे, दूर हो गया हूं मैं,
तुम बस मुस्कुरा देना, मैं लौट आऊंगा !

शकल नाराजगी में , तेरी बिगड़ जाती है,
सब्जी तीखी बना देना, मैं समझ जाऊंगा !
------------------------ तनु थदानी






मंगलवार, 31 दिसंबर 2024

जरूरी ये था कि , रिश्ते को बचा जाते भाई

   जरूरी ये था  कि , रिश्ते को बचा जाते भाई !
   महज करना था ये कि, बहस  हार जाते भाई!

   बात मनवाने को क्या चींखना जरूरी था ?
   बड़ा भाई ही तो था, बस रूठ ही जाते भाई !

   ये तो अच्छा हुआ कि, खुद की नजर में गिरे थे,
   तसल्ली से जरा सोंचो कि,क्या बताते भाई  !

   जुबां पे आग या मिश्री रखो, निर्णय तुम्हारा,
   अब तो बालिग हो तुम्हे, क्या ही समझाते भाई?

   बहुत उलझा हुआ है लाभ व हानि का गणित,
   दिल के स्कूल से आते, तो बताते भाई  !
    ---------------------  तनु थदानी
     

गुरुवार, 19 दिसंबर 2024

देश हमारे बाप का है, हम,ठोक के सीना कहते हैं





सहिष्णु हमको जग वाले, ऐसे ही न कहते हैं !
संग हमारे सांप व बिच्छू, मेरे ही घर रहते हैं !

पांच बार लाउडस्पीकर पर, गंदी चींखे वो मारे,
पूरे हिन्दुस्तान के वासी, बेबस से बस सहते हैं !

तीन बीबीयां तेरह बच्चे, हर घर एक कबीला है,
मासूमों के जेहन तक, जेहादी कीड़े बहते हैं !

सोचो इनकी सोच सैतालिस सी ही है,सर्तक रहो,
सनातनी भूमि पर,गिद्ध सी, नजरें गाड़े रहते हैं!

सौ हैँ नदियाँ, एक भी उर्दू अरबी इनके नाम नहीं,
देश हमारे बाप का है, हम,ठोक के सीना कहते हैं !

शनिवार, 7 दिसंबर 2024

पुराने कपड़े मैली याद के, मैं धो नहीं पाता !


पुराने कपड़े मैली याद के, मैं धो नहीं पाता !
दिल की जमीं पे इक सुकूँ भी, बो नहीं पाता!

जिंदा हूं जमाने में खड़ा, उस मुहाने पर  , 
जहां दुख तो पाता हूँ मगर,मैं रो नहीं पाता! 

लहजे में तेरे है नमक, गल्ती नहीं तेरी,
बस घाव हैं मेरे खुले , मैं सो नहीं पाता !

यादों का जंगल है,वफा के, पेड़ ही नहीं ,
जा के लौट हूं आता मगर ,मैं खो नहीं पाता !

मुझे मुस्कान पंसद है , तुम्हारी हो या हमारी , 
हमेशा मुस्कुरा के हम मिलें, क्यूँ हो नहीं पाता ?
---------------------------- तनु थदानी