शुक्रवार, 11 मई 2012

क्या मैं शापित हूँ hey eshwar-3 tanu thadani हे ईश्वर -3 तनु थदानी





मैं  तेरे  खेल  का  हिस्सा  हूँ , ईश्वर जुड़ के  अर्पण से !
दिया  तूने  सभी  कुछ  है ,मगर  लगता  है बे-मन से !

दिए  जो  होंठ तो मुस्कान  मेरी ,रख ली   क्यूँ  ईश्वर  ?
तभी  तो  प्रेम  हूँ  करता , तुम्ही  से, पूरी  अनबन से !

मेरे आँगन नहीं चहकेगी चिड़ियाँ ,क्या  मैं  शापित  हूँ,
दिला  इस  श्राप  से मुक्ति ,या कर  दो  मुक्त जीवन से ! 

मैं   तेरा   ही   चढावा    हूँ  , मैं   तेरे    पास   आउंगा ,
बचा के मुझको रखना ,इस जमाने  भर की जूठन से !


रविवार, 6 मई 2012

बुद्धू हूँ मैं बुद्धू

फकत था  दोष   इतना   ही ,.सरे  बाज़ार  पिट  आया !
लगा  अजान मंदिर में,भजन  मस्जिद में क्यूँ  गाया ?

जो  मैने   ये   कहा   अल्लाह  का , अनुवाद   है  ईश्वर,   
किसी   को  मेरी  भाषा  का ,गणित ये  छू   नहीं  पाया !

इबादत तुम  इसे  समझो  , या  समझो  मेरी  नादानी ,
बहुत  थी  भीड़  मंदिर  में , सो  बच्चे  पार्क   में  लाया !

तमाम   किस्म  के  थे  फूल  , उस  प्यारे  बगीचे  में ,
तमाम  फूल  में  ही  बच्चो को , भगवान्  दिखलाया !

सभी  बच्चों  ने  आखिर  ये  कहा , बुद्धू   हूँ  मैं   बुद्धू ,
किसी  भी क्लास में उनको नहीं ,ये तो था बतलाया !
-------------------------------------- तनु थदानी

शुक्रवार, 4 मई 2012

बेशक तुम्हे बना के मैं,खुद ही परेशां हूँ


ईश्वर  कहा फिर  मुझको  ही , शर्मिंदा  कर  दिया !
मैने  तो  यूँ   कहा  नहीं  , तू   जिस   तरह   जिया !

खरीद - बेच   क्या   रहा  , सम्पूर्ण    जीवन   में ,
सब   छोड़  के  आएगा  फिर ,पूछूंगा  क्या किया  ?

जो   मुफ्त  में   मैने   दिया , तुमको   नहीं   कदर ,
सुख  के  लिए  मशीन  से , क्या -क्या  बना लिया !

दिन  चार   दिये  कोख   से ,आने को  कब्र  तक ,
इतना ही  नहीं  प्यार  का ,  रस्ता  भी  था  दिया ! 

क्यूँ  रास्ता  वो  छोड़  कर  , भटका गली - गली ,
अमृत  को  छोड़  क्यूँ  भला , अपना  लहू  पीया?

बेशक   तुम्हे  बना   के  मैं  , खुद  ही  परेशां  हूँ ,
सब  लड़  मरे   मेरे  लिए  , कोई   नहीं  जीया !
-------------------------------  तनु थदानी

बुधवार, 2 मई 2012

मैं अकेला हूँ hey eshwar-3 {tanu thadani} हे ईश्वर -3 {तनु थदानी }





मैं   अकेला  हूँ  मुझे  , मुझसे  मिला इक  बार  तू !
ए खुदा  ग़लती से ही पर ,मुझ से तो कर प्यार तू !


शब्द  की  जिन - जिन सलीबों ,पे  मेरा  वजूद  है ,
उन सलीबों  में  भरो , इस जिन्दगी  का  सार  तू !


आत्मा  से  तुझको  खोजा ,बस  मिली  बेचैनिया ,
जिस्म  की  गहराइयों में ,क्यूँ  मिला  हर बार तू !


तन्हाइयों  के  शोर  में  दी , अनकही   विरक्तियाँ,
तू अगर  ईश्वर है तो फिर ,कर न यूँ व्यवहार  तू !

रविवार, 29 अप्रैल 2012

कोई मर्म तो समझे hey eshwar-3{tanu thadani} हे ईश्वर -3 {तनु थदानी }





तमाम  उम्र   मैं  रिश्तों  की  , कसौटी  पे  कसा  हूँ !
मेरी  खुशियाँ   गई  कतरा , मैं  गोया  एक  नशा हूँ !


मैं सांझा  कर  रहा जज्बात ,कोई  मर्म  तो  समझे ,
बड़ी  ही  मार्मिक पड़ताल  की ,गलियों  में  फंसा  हूँ !


मुझे  ईश्वर  ने  भेजा ,खोल  के  दिल ,ये  जहां  जिऊ ,
मगर  मैं   नागफनियों से  भरे ,इक  घर में  बसा हूँ !


तुम्हारी  चीज़  हे  ईश्वर, जो  ली  वापस  हमीं  से  तो,
सभी  रोये  दिनों  तक थें ,मगर इक मैं  ही हँसा  हूँ !


तुम्हारे  खेल  के कायदे -नियम ,सब  जान  हे ईश्वर , 
यहाँ न  जीत  है ना हार  है , फिर  भी  क्यूँ  फंसा हूँ ?

पहले माँ से प्रेम करो hey eshwar-3 हे ईश्वर -3 { तनु थदानी }





इश्क  मोहब्बत  सो  ही  जाने  ,जिसने  खुदा  को  जाना !
सफल  वही  है  प्यार  को  जिसने  , एक  इबादत  माना !


प्यार  का  कोई  गणित  नहीं  है  , न  विज्ञान , न  भाषा ,
पगले   प्यार   को   ढूढ   रहे  ले  ,  रूपये -  पैसे-  आना !


पहले   माँ  से   प्रेम  करो  फिर ,  भाई - बहन   से  लाड़,
शर्तों    वाले   कोई   खिलौने  , कभी   बीच   ना   लाना !


सीधे -सीधे  लफ्जों   में , इक   बात  कहूँ , ये  सुन  लो ,
रोते - रोते   आये  तुम  , हँस  कर  के  ग़ुम  हो  जाना ! 

सोमवार, 23 अप्रैल 2012

"प्रेमी हूँ ईश्वर का" hey eshwar-3 हे ईश्वर -3 { तनु थदानी }



सोचो  सिकंदर  इस  जहाँ   में ,  लूट  क्या  पाया  ?
सबकी तरह जाते  समय बस, इक कफ़न  पाया  !

नौटंकियों   के   बीच   खेला ,  खेल   कृपा    का ,
अपनी जरुरत  भर  का  इक , भगवान्  बनाया !

मैंने   बड़े   करीब   से  , देखा   है    इक   पतन ,
कि भूख  में खुद  का किसी  ने ,मांस  था  खाया !

जिसने मुझे जो कुछ दिया,सब कुछ दिया लौटा,
गाली  हो या इज्ज़त मैं ,कुछ  रख  नहीं  पाया  !

मैं  क्यूँ   करूँ  श्रृंगार , जो,  प्रेमी  हूँ  ईश्वर   का , 
बस चाहिए  उसको ह्रदय , न  काया  न   माया !

माँ  शब्द  ही  मिले  नहीं , पावन  कोई    तुमसे ,
बस  इसलिए तुझ पे मैं  ग़ज़ल ,लिख नहीं पाया !