सोमवार, 17 नवंबर 2014

हम सलीके आदमी , मिल भी पायेंगे कहाँ

हम सलीके आदमी , मिल भी पायेंगे कहाँ ?
डाके भी डालते हैं, कर के पूजा हम यहाँ !

चालाकियां,चालाकियां,चालाकियां,चालाकियां,
कर रहें कदमों से ले , सांस तक यहाँ वहाँ !

है अगर भगवान तो भी,क्या करेगा वो भला ,
लूटते  हैं  देश  को  चल , कौन देखेगा यहाँ ?

एक फ्लैट ,  एक गाड़ी ,  बाप  वृद्धाआश्रम  ,
कर लिया फतह सुनो जी,इस तरह सारा जहाँ !
----------------------  तनु थदानी

रविवार, 16 नवंबर 2014

tanu thadani तनु थदानी मुझे ग़ज़लों की नज़र से ही पहचाना करो.

तुझे बस आईना दिखलाया , इतना खीज नहीं !
दिखेगी  भी  नहीं , गंर, तन पे है , कमीज नहीं !

मुझे  ग़ज़लों  की  नज़र  से ही , पहचाना  करो ,
कि  मैं  शक्ल  से , पहचान  वाली  चीज  नहीं !

किसी की  फिक्र में मिलता हूँ , खुशनसीबी मेरी ,
किसी भी  जिक्र  में रहने  की  ,है  तमीज  नहीं !

वो रोया , आँखें   मेरी , आंसुओं  से  भर  आई  ,
उसी  पे  ग़ज़ल  लिखूं  , इतना  बदतमीज  नहीं !

tanu thadani तनु थदानी चलो इक बार जी के देखते हैं फूल की भाँति


शनिवार, 8 नवंबर 2014

tanu thadani तनु थदानी बस बात इतनी सी थी

आते  ही  धर्म  थामा , यूं  कमजोर आयें हम!
फिर जातियों को नाम तक में,जोड़ आयें हम!

गानों में भी हिन्दू भजन, मुस्लिम कव्वालियां ,
सुर तक में भी जाति, ओं धर्म ओढ़ आयें हम!

बगिया के फूल थे जीवित,पत्थर तो थे निर्जीव,
उन पत्थरों के खातिर  , फूल तोड़ आयें हम!

ईश्वर  बड़ा  दयालु  तो , हथियार हाथ क्यूँ ?
हर देवता संग शस्त्र तो,किस ओर आयें हम?

बाबू जी  रहें  उम्र  भर  , खिलाफ  पंडो  के ,
पर श्राद्ध में पंडो से , रिश्ता जोड़ आयें हम!

बेहद अजीज दोस्त था पर,था वो मुसलमान,
बस बात इतनी सी थी,दोस्त छोड़ आयें हम! 

बुधवार, 5 नवंबर 2014

tanu thadani तनु थदानी गद्दी छोड़ो ओ राजा जी

हम लिखते,दुःख की कविताएँ ,उनसे पूछो दुःख के माने !
जिन बच्चों ने, ओढ़ गरीबी , सपने अपने दुःख से साने !

मायूसी  के  बीहड़  वाले , बच्चों  में  मुस्कान  कहाँ  है ?
धूप  ठंड  और भूख के देखो , उलझ गयें सब ताने बाने !

कचरा बीने , ईटें ढ़ोये , बचपन  आखिर  कितना  रोये ?
देश  हमारा  चला  रहें   हैं , अंधों  में  जो  राजा   काने !

बच्चों  के  लब  खिलने  वाली , हँसी  हमारी पूंजी है जी ,
वही नहीं गंर देश में बोलो , रुपये - डाॅलर  के क्या माने !

फुटपाथ  पे  पलता  बचपन , देश  के भावी  कर्णधार हैं ,
उन तक तो न पहुँच सके पर,  लगे चाँद पर आने - जाने !

बाल- मजूरी वाला चिंतन  , होटल  पांच सितारा में क्यूँ ?
गद्दी  छोड़ो  ओ  राजा  जी ,  नहीं   चलेंगे  और  बहाने !

रविवार, 2 नवंबर 2014

tanu thadani तनु थदानी पता ठिकाना भूल गयें हैं

तुमको रोता देख के रोयें , ऐसा हमने प्यार बनाया !
तुम बिन जी पायेंगे कैसे , चुप्पी का जुगाड़  बनाया !

साथ चलो गंर आँख मूंद भी,नहीं गिरोगी संग मेरे तू ,
आस का घर तुमसे जब टूटा,हमने ही हर बार बनाया!

प्यार करूँगा बदले इसके ,प्यार ही माँगू शर्त नहीं ये ,
नहीं वो होगा प्रेमी जिसने ,चाहत को व्यापार बनाया !

सांसो की औकात नहीं कि,नाम वो तेरा भूल के आये ,
जिन सांसो में नाम न तेरा, उनसे न व्यवहार बनाया !

नहीं चाहिये  शहर चमकता ,नहीं चाहिये लोग पराये ,
हम-तुम जितना ही अब मैंने ,छोटा सा संसार बनाया !

पता ठिकाना भूल गये हैं ,अब तो तेरे ख्याल में रहते ,
ईंट के घर में पता नहीं है , कौन गया है कौन है आया !


मंगलवार, 28 अक्टूबर 2014

tanu thadani तनु थदानी भारत बड़ा खुश है

घमंडी हूँ , है रूआब कि , भारत बड़ा खुश है !
हर  शै  में आफताब कि , भारत बड़ा खुश है !

सीमा  पे  मुझे  सोते , नहीं  आप   देखोगे ,
पर देखता हूँ ख्वाब कि , भारत बड़ा खुश है !

बे - फिक्र होली खेलो , दिवाली मनाओ जी ,
चाहत यही जनाब कि , भारत बड़ा खुश है !

माँ  खुद  ने  दी जुराब, बोली डगमगाना ना ,
पैरों  में  वो जुराब कि , भारत बड़ा खुश है !

सीमा  पे  आ  के  पूछते , हैं  हालचाल जो ,
उनको मेरा जवाब कि , भारत बड़ा खुश है !

ऐ दुश्मनों ! गंर तुम भी , हिमाकत  नहीं करो ,
तो तुमको भी आदाब कि ,भारत बड़ा खुश है !