गुरुवार, 9 जुलाई 2015

चलो इक बार जी के देखते हैं तनु थदानी tanu thadani chalo ek baar je ke dekhte hain

 चलो इक बार जी के देखते हैं

 ये मेरी नींद भी तब तक,  मुकम्मल हो नहीं पाती !
प्रिय मेरी , मेरे सपनों में , जब तक आ नहीं जाती !

मेरी किस्मत भी तो इक कील है,जीवन फटी पतलून,
जिसे अक्सर बचाता हूँ , मगर वो कील चढ़ आती !

खुदा ने सब बनाया ठीक, बनाया दिल मगर ये क्यूँ ?
जहाँ यादें सदा  फंसती , मगर सांसे निकल जाती !

तुम्हारे  पास  भी  परिवार  था , था  पास  मेरे  भी ,
तुम्हारा प्यार ही तो  है , जो सबको  छोड़ के आती !

हमारे  पग  , हमारे   मैं   के  , लंबे , राह  में  भटके ,
जुबां  पे  नीम  की  खेती , हमें क्या खाक समझाती ?

नगाड़े  जब  बजे दूरी के , तब  इक  मौन  सोता था ,
उमर  के  इक  धमाके  ने , बनाया  फिर हमें  साथी !

चलो  दिमाग  की  खेती  में  हम ,  माफी  उगाते  हैं ,
चलो  इक  बार  जी  के ,  देखते हैं , फूल की भाँति !
---------------------------------------  तनु थदानी

रविवार, 15 फ़रवरी 2015

tanu thadani तनु थदानी फिर नींद मुझे बेहतर आयी

नीयत जब मेरी बहनों से , मुझसे बिन पूछे लड़ आयी !
मैंने कितना भी स्वांग रचा,पर आँखें फिर भी भर आयीं!

मन चुप था , धन जो चंचल था , बहनें मेरी उनसे खेलीं ,
मन था ही नहीं,इस बात की वो,हर इक से चर्चा कर आयीं!

वो रंग बिरंगी तितली थी , जो संग थी खेली बचपन में ,
जीने के नाटक में बिछड़ी , वो फिर से मेरे घर आयी !

सब दिया मगर वो हंसी नहीं,वो जीत हार में फंसी रही,
मैं जीत हार से मुक्त हुआ , फिर नींद मुझे बेहतर आयी !
                                    ------- ----  तनु थदानी

शनिवार, 31 जनवरी 2015

पाया सुकून ख्वाहिशों को,जो घटा गया

पाया सुकून ख्वाहिशों को , जो घटा गया !
खुशहाल हुआ ज्यों ही अपना ,मैं हटा गया !

दूरी  नहीं  मिटी , मिटायी  लाख  लकीरें  ,
लफ्जों का वो कबाड़ी,जाने क्या चटा गया !

मैं  गिन रहा था जोड़ जोड़, गल्तियां उसकी ,
आया,गले मिल कर के वो,सब कुछ घटा गया !

था प्रश्न, बनना क्या है? तो , मैंने कहा बच्चा ,
 कह तो दिया , न होगा , मैं बस छटपटा गया !
-------------------- तनु थदानी

शुक्रवार, 30 जनवरी 2015

tanu thadani तनु थदानी एक मजहब बनाते हैं


एक मजहब बनाते हैं , एक ईश्वर बनाते हैं !
हमें हैं बेचने कट्टे , चलो सबको लड़ाते हैं !

मुझे बेवकूफ तुझको बोलने का,अब नहीं मतलब,
लड़ाता मैं हूँ फिर भी फैसले , मुझसे कराते हैं !

तुम्हारी धर्म पुस्तक में , जो खंजर घूमता रहता ,
उसी की धार पे खूं के निशां ,सबको डराते हैं !

किसी मासूम की आंखों में ना,आंसू कभी आये ,
चलो मजहब को तेरे मोड़ , खिलौना बनाते हैं !







गुरुवार, 22 जनवरी 2015

tanu thadani तनु थदानी मुझे तुम नास्तिक कह लो

कहीं  सवाल  के  उत्तर में , पत्थर बाज बनते हैं !
यही तो प्रश्न है कि , क्यूँ हम पत्थर बाज बनते हैं ?

हजारों गज जमीं जो  गांव में थी , छोड़ छाड़ कर,
यहाँ सौ गज के घर में रह, तरक्की बाज बनते हैं !

वो मां ने जान के चालाकियां ,फिर भी दिये कंगन,
मगर  समझे  नहीं  बेटे , यूं  चालबाज  बनते हैं !

गजब थी भीड, फाटक बंद था , थी रेल आने को ,
निकाला खुद को नीचे से , बड़े जांबाज  बनते हैं !

हमारे  पास  मौके  खूब  आते , इंसा  होने  के ,
मगर हम आदतन, खुद से ही ,धोखेबाज बनते हैं !

फरिश्ते  देख  कर  भागे , हमारे हाल धरती के ,
कि  ईश्वर पालने के भी  यहाँ , रिवाज बनते हैं !

हम ही बस श्रेष्ठ हैं , सारी लड़ाई का यही मुद्दा ,
धरम की देह पे नाहक ही, खुजली खाज बनते हैं !

कभी मिलना हो मुझसे तो,धरम को छोड़ के मिलना ,
धरम को  ओढ़ने  वाले  ही , पंगेबाज  बनते  हैं !

मुझे तुम नास्तिक कह लो,मगर ये तो बताओ,क्यूँ,
धरम  से युद्ध  व  जेहाद  के , अल्फाज बनते हैं ??




शुक्रवार, 19 दिसंबर 2014

tanu thadani तनु थदानी अच्छा नहीं लगता

कोई मारे या कि हत्या करे , अच्छा नहीं लगता !
करे  कोई  और  कोई  भरे , अच्छा नहीं लगता !

मेरे  चाचा  को  सांप पालने  का , शौंक चर्राया ,
विष  से मेरे  बेटे  मरे , अच्छा  नहीं  लगता !

मेरी  किताब  में  फरमान  है  जो कत्ल करने का ,
खुदा का बोल कर के जो पढ़े,अच्छा नहीं लगता !

हजारों आयतों में फांस कर, हमको फंसाया है ,
किया इंसान से हमको परे , अच्छा नहीं लगता !

मेरे अब्बू मेरी अम्मी , मेरे शिक्षक भी अल्लाह हैं ,
अल्लाह एक है इस पर लड़े , अच्छा नहीं लगता !


शुक्रवार, 12 दिसंबर 2014

tanu thadani तनु थदानी बुरी खबर है

आदमी बन  के जी रहें थे ,मगर क्या ये हो गया ?
हमें हिन्दू - मुसलमां कर के हमें, कौन धो गया ??

मेरे परिवार का मसला था कि,अम्मी कहूँ या माँ ,
मगर नेता वो हिन्दी उर्दू का,मसला क्यूँ बो गया ?

मैं अपनी भूख के मुद्दे पे न,सो पाया पिछली रात ,
वो मेरा सांसद संसद में जा के, कैसे सो गया ?

यहां इसाईयत हिन्दू मुसलमां , सब सलामत है ,
बुरी खबर है इनकी भीड़ में , भारत ही खो गया !
-------------------------- तनु थदानी