बुधवार, 9 जुलाई 2025

भाग रही है उम्र हमारी

भाग रही है उम्र हमारी,फिर भी खुद को बहलाते हैं! 
यहाँ तो हम  थे जीने आये, जी न पाये, मर जाते हैं!

सदा कसूर नहीं होता है , इंसानों की गल्ती का भी, 
कभी अकड़ के कारण भी तो,रिश्ते स्वाहा हो जाते हैं!

देश, माँ, जल, अग्नि, वायु, पूजा योग्य बता के हम तो, 
इंसानों में गिने हैं जाते, चाहे काफिर कहलाते हैं  !

वफ़ा की बातें करने वाले, इश्क़ की बातें करने वाले, 
पढ़े लिखो के शहरों में तो, पागल बुद्धू कहलाते हैं!

नहीं जरूरी सभी बड़ों की, बातें सभी ही मानी जाये, 
हर समाज में मूरख भी तो, आखिर बूढे हो जाते हैं!
----------------------------------- तनु थदानी

सोमवार, 30 जून 2025

हमेशा साथ होते हैं, मगर अक्सर नहीं मिलते !

हमेशा साथ होते हैं, मगर अक्सर नहीं मिलते  ! 
लपक के हाथ मिलाते, मगर खुल कर नहीं मिलते! 

वो मजदूर जो कि दूसरों के, घर बनाते हैं, 
उन्ही के घर पे सलामत, कभी छप्पर नहीं मिलते! 

बड़ी खाई है सन्नाटे की, गिरता जा रहा हूँ मैं, 
हमारे शहर में परिवार वाले, घर नहीं मिलते  ! 

तुम्हीं से चोट हूँ खाता, बिखर के टूट हूँ  जाता, 
तुम्हारे हाथ में लेकिन कभी, पत्थर नहीं मिलते  ! 

किसी की मुस्कुराहट में, कोई छल हो भी सकता है, 
मैं इसको जान न पाता कभी, तुम ग़र नहीं मिलते  ! 
-------------------------------  तनु थदानी

सोमवार, 9 जून 2025

अब अपनी कहो देखभाल, कैसे करें हम ?



अब अपनी कहो देखभाल, कैसे करें हम ?
जो  सीखा ये, जीना मुहाल, कैसे करें हम!

जिसने ये गढ़ा,माँ, प्रकृति पूज्य ही नहीं,
ऐसे लिखे कि, देखभाल, कैसे करें हम ?

बोले खुल्लेआम कि, मारो लगा के घात,
ऐसे गुरू पे आंखे लाल, कैसे करें हम ?

जिसने लिखा कि औरतें, खेती है तुम्हारी ,
फिर ऐसे जाहिलों का ख्याल, कैसे करें हम?

संवाद फरमाया कि, मैं मुस्लिम हुँ, सब काफिर,
इंसानियत का, फिर  सवाल, कैसे करें हम ?
-------------------------------  तनु थदानी

बुधवार, 4 जून 2025

चलो, अब घर को चलते हैं

हो गया बहुत कमाना,चलो,अब घर को चलते हैं!
नहीं और दूर न जाना, चलो,अब घर को चलते हैं!

हमारी मर्जियां,  तो खुद हमारी, सांसे न माने,
चलेगा अब न बहाना, चलो,अब घर को चलते हैं!

सुना है शहर में तेरा ,घर बिस्तर है सब छोटा,
तू अपने पैर फैला  ना,चलो,अब घर को चलते हैं!

कहीं बे शक्ल आवाजों की, बातों में न आ जाना,
नहीं मन और भटका ना,चलो,अब घर को चलते हैं!

तुम्हारे गांव में तुमको, सब, तेरे नाम से जाने,
यही बस सबको बताना, चलो,अब घर को चलते हैं!
----------------------------------  तनु थदानी