शनिवार, 17 मई 2025

पप्पू ही तो कहा था

दौलत बढी पर शौहरत में, वो पिछड़ गये !
इक झूठ से मिलते ही जो,खुद से बिछड़ गये!

दुनियां की पसंद आज भी , सच वाले लोग हैं,
किसने कहा कि झूठ वाले,आगे बढ गये ?

दिल में जो उतर जाये, उसे दोस्त बनाना,
रहना सदा ही दूर, जो, दिल से उतर गये !

मौजूद तो हो तुम, मगर जीवित नहीं हो गर,
जो देख के मजबूर, नजरअंदाज कर गये !

मैंने तो उसके बच्चे को, प्यार किया था,
पप्पू ही तो कहा था, फिर क्यूँ वो लड़ गये!
----------------------------  तनु थदानी

शनिवार, 10 मई 2025

अपने एकांत को भी, महफूज रखना सीख

बुढापे ने पांव अपना जो,थोड़ा सा फैलाया!
आराम से वो फैल मेरी,शक्ल तक आया!

कहीं छोड़ न देना,कहा,और प्यार भी किया,
उसी ने छोड़ा न कहीं का,मैं, समझ न पाया ! 

बे अकल भी साबित हुआ, है सोने सा खरा,
बुद्धि की जगह जेब भरी, सबको दिखाया !

रो रो के पूछा हाल जो,हमदर्द बन के फिर,
दिन दूसरे ही,उसने सबको, हँस के बताया!

अपने एकांत को भी, महफूज रखना सीख,
मेल-जोल रफ्ता रफ्ता, मोल-भाव तक आया!
------------------------------तनु थदानी