अपने एकांत को भी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
अपने एकांत को भी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शनिवार, 10 मई 2025

अपने एकांत को भी, महफूज रखना सीख

बुढापे ने पांव अपना जो,थोड़ा सा फैलाया!
आराम से वो फैल मेरी,शक्ल तक आया!

कहीं छोड़ न देना,कहा,और प्यार भी किया,
उसी ने छोड़ा न कहीं का,मैं, समझ न पाया ! 

बे अकल भी साबित हुआ, है सोने सा खरा,
बुद्धि की जगह जेब भरी, सबको दिखाया !

रो रो के पूछा हाल जो,हमदर्द बन के फिर,
दिन दूसरे ही,उसने सबको, हँस के बताया!

अपने एकांत को भी, महफूज रखना सीख,
मेल-जोल रफ्ता रफ्ता, मोल-भाव तक आया!
------------------------------तनु थदानी