मंगलवार, 11 जून 2024

नश्वर चीजों के खातिर हम, पूरा ही जीवन हैं लड़ते !

नश्वर चीजों के खातिर हम, पूरा ही जीवन हैं लड़ते  !
मटके में छेद है जान के भी, अन्जान बने पानी भरते! 
 
अब पैसे से आराम नहीं, इक खौफ का रुतबा आता है, 
बेटा पढ़ लिख अब कमा रहा, सो बाबू जी भी हैं डरते! 

इज्जत इंसान की न होती, जरूरत की इज्जत होती है
पेंशन न हो तो बाबूजी, मन मार के रोज मरा करते  ! 

हम अनपढ़ हैं, हमरे कारण ही, हिंदी भाषा बची हुई, 
वरना तुम अंग्रेजी पढ़ कर, तो राम- राम भी ना करते! 

ये गज़ब हमारे देश का भी, है  मौसम का अंदाज तनु, 
लू से तो न मरते जितने, पैसों की गर्मी से मरते!
-------------------------------  तनु थदानी

शनिवार, 8 जून 2024

अगड़ी पिछड़ी ऊंच नीच, क्यूँ जाति में बंट जाना है?

अगड़ी पिछड़ी ऊंच नीच, क्यूँ जाति में बंट जाना है? 
हिंदू हो सब हिन्दू बोलो, क्या ये भी समझाना है?? 

आसमान में उड़ने वालों , जमीं न भूलो बचे रहोगे, 
 गोधूलि के जाते जाते,    आखिर घर तो आना है  ! 

तेरे घर न आता सो तुम ,उसके घर न जाते हो, 
रिश्ता न रखने का कोई, ये भी खाक बहाना है? 

बे सुध सोने वालों को ,उनके हित में आवाजें दो, 
सोने का नाटक जो करते, उनको नहीं जगाना है  ! 
---------------------------------  तनु थदानी

शुक्रवार, 7 जून 2024

हम ही लाठी, हम कपास

हम ही लाठी, हम कपास, खुद ही को कैसे धुनते ? 
ऊपर से ठंडे रहते , जीवन जीते जलते भुनते  ! 

गले मिला तो रीढ़ नहीं ,आंख कहीं तो नज़र कहीं, 
ऐसे रिश्तेदारों में फंस, हम भी तो पूरे सुन्न थे  ! 

ज्यादा पढ़े लिखे या मूरख , ज्यादा फर्क नहीं होता, 
दोनों इक जैसे हैं होते , दोनों किसी की न सुनते! 

जग जाहिर था चोर है वो,टोपी पहन के खड़ा हुआ, 
बात थी देश चलाने की तो, कैसे भला उसे चुनते ? 
-------------------------------  तनु थदानी

बुधवार, 5 जून 2024

सब जीरो हो जाना है

 मत कर तू अपनों से अनबन ,सब जीरो हो जाना है!
 जितना भी चमको तुम बन ठन,सब जीरो हो जाना है! 

  गले में सोना,हाथ में सोना,सब ऊंगली में सोना सोना,
 अंत समय में सब कुछ छन छन,सब जीरो हो जाना है! 

 मांसपेशियां खूब फुलाओ, कमजोरों को खूब दबाओ, 
 जैसे छूटा सांस का दामन, सब जीरो हो जाना है! 

 मार के खाया,छीन के खाया,लूट के खाया,बीन के  खाया, 
 पूरा जीवन हाथी सा बन, सब जीरो हो जाना है  !

 शौहरत आयी,घमंड आ गया,पैसे पा के रोब छा  गया,
 मौत का तुझ पे,ज्यों आया मन,सब जीरो हो जाना  है  ! 

 दौड़ लगाई ,जीते भी बन,नंबर वन, पर यहाँ  अंततः, 
 सब कुछ बस यूँ आनन फानन,सब जीरो हो जाना  है! 

  क्रीम लगाओ,खूब छिपाओ, झुर्री और लकीरों को, 
  उम्र बढ़ेगी, घटेगा जीवन,सब जीरो हो जाना है  ! 

  पूरा जीवन प्लाट खरीदे, फुट में, गज में, बीघे बीघे,
  चिता पे लेटेगा छे फुट बन, सब जीरो हो जाना है  ! 
   --------------------------------------  तनु थदानी

सोमवार, 27 मई 2024

जब ग्लेशियर आवेग का, बिस्तर पे पिघलता!

जब ग्लेशियर आवेग का, बिस्तर पे पिघलता! 
सिरहाने दुबका प्रेम तो बस, हाथ है मलता  ! 

बेहद उथल पुथल है, इक पागल सा शोर है, 
आवेग और खुमार में, क्या प्यार है पलता  ? 

ना  घटता न बढ़ता ,यही है सच का तक़ाज़ा  ! 
रबड़ सा झूठ है होता, सदा आकार बदलता  ! 

हमारे पास शिद्दत के सिवा कुछ भी नहीं यारों, 
सिवाय हौसले के संग मेरे, कोई न चलता  ! 

वैसे तो तुम भी आदमी, मेरी तरह हो दोस्त, 
व्यवहार में है ओहदे का , संग बस खलता  ! 
----------------------- तनु थदानी



गुरुवार, 16 मई 2024

बाहों में नशे की, झुलाया जा रहा उसे !

बाहों में नशे की, झुलाया जा रहा उसे  ! 
दिल्ली को बता दो, सुलाया जा रहा उसे! 

मकान को मालूम नहीं , बिक चुका है वो, 
वो खुश है,फिर से,सजाया जा रहा उसे! 

ऐसा नहीं कि योग्यता है, उसमें कार्य की, 
मुकाबला ही शून्य, तो लाया जा रहा उसे! 

मुफत के जोश में, नज़र पिंजड़े नहीं आते,
चूहों में जश्न है, खिलाया जा रहा उसे !


शनिवार, 11 मई 2024

मुंह में जो जुबां है वो, तलवार नहीं है!

मुंह में जो  जुबां है वो, तलवार नहीं है! 
जो नाप तौल के किया,वो प्यार नहीं है  ! 

बेशक सोने चांदी से ,जीवन को सजा ले, 
गर माँ नहीं जीवन में तो, श्रंगार नहीं है! 

नेता हो या फकीर या,अमीर क्यूँ ना हो, 
कोई नहीं जो माँ का, कर्जदार नहीं है! 

अपने ही हैं , कोई भी, शातिर नहीं लगता, 
कोई तो मान लो कि हम, बीमार नहीं हैं!  

बस चापलूसी न थी, सो ईनाम न मिला, 
बस कह दिया कविताएँ धारदार नहीं है! 
----------------------  तनु थदानी