अख़बार बन जाऊँ! लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
अख़बार बन जाऊँ! लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शुक्रवार, 1 दिसंबर 2023

रोटी से मैं लिपटा हुआ, अख़बार बन जाऊँ!

रोटी से  लिपटा हुआ, अख़बार बन जाऊँ! 
भूखे के लिए रोटी वाला, प्यार बन जाऊँ! 

मैं प्यार के दो लफ्ज़ पे, सब  लुटाता हूँ, 
पैसों से गर बिक जाऊँ तो , बेकार बन जाऊँ! 

पढ़ा लिखा के माँ ने  , बस ये नसीहत दी , 
दिल से  इक अनाड़ी  , गँवार बन जाऊँ! 

खामोशी के बाज़ार में, मुस्कान गुम हुई, 
तो क्यों न  खुशी का  ही, व्यापार बन जाऊं! 
---------------------------------  तनु थदानी