शुक्रवार, 3 अक्टूबर 2025

ये भी अच्छा हुआ


ये भी अच्छा हुआ,जरूरत के वक़्त,तुम नहीं आये ! 
उसी इक वक़्त ने ,जीवन के सारे,  पाठ सिखलाये  !

तू बेशक उम्र के ,चाटे जा तलवे, उम्र भर, पर सुन, 
उमर खुद को तो बढ़ाये, मगर जीवन तो घटाये  ! 

मुकम्मल जुर्म तो कर लूं, मैं तुमसे प्यार करने का,
सजा तो संगनी सी है ,खड़ी , बांहों को  फैलाये  ! 

दिल छू ले,तू ऐसी बात कर, गंर  दोस्त है मेरा, 
इधर उधर के किस्से तो ,सबों ने खूब  बतलाये  ! 

सबों से मश्वरा लेना, अदब से मुस्कुरा कर के, 
मगर करना वही जीवन में, तेरे दिल को जो भाये! 
------------------------- तनु थदानी




सोमवार, 22 सितंबर 2025

tanu thadani तनु थदानी भोले दिल के नहीं ग्राहक हैं


जब कलपूर्जे ही नीयत के ; घिस के रद्दी हो जाते हैं !
चेहरे चिकने या गोरे हो ;वो साफ़ कहाँ रह पाते हैं !


हम कत्लगाह के बाशिंदे ; हम जन्नत - हूर- परी मांगे ;
पर काम किया करते ऐसे ; कि कहने में शरमाते हैं !


अब भले बुरे का पैमाना ; इकदम ही गैरजरुरी है ;
औक़ात यूं नापी जाती है ; कि कितना रोज कमाते हैं !


घर - घर में घातों के परदे ; यूं बड़े सलीके टंगे मिलें ;
ज्यूं नंगे खड़े थे बता रहे ; कि कपड़े पहन नहाते हैं !


मातम पे रोने वाले जब ; ढ़ेरो मिन्नत से हैं आते ;
ऐसे जीवन की शैली पे ; आंखों में आंसू आते हैं !


किडनी -लीवर -आँखें व रक्त ; अब सबके दाम हुए निश्चित;
भोले दिल के नहीं ग्राहक हैं ; बाज़ार के लोग बताते हैं !
------------------------- तनु थदानी

शुक्रवार, 19 सितंबर 2025

बुद्धि में किये छेद तो, सुख कैसे भरोगे?

बुद्धि में किये छेद तो, सुख कैसे भरोगे? 
सम्मान न दे ,मान को ,कैसे भला लोगे? 

धोखे सा वफादारी में, सानी नहीं कोई, 
वो लौट के आयेगा, जिसको भी तुम दोगे! 

विरोध करोगे कोई ,दिक्कत नहीं मुझको, 
परेशानी होगी तब, जो तुम तारीफ करोगे! 

अमीर न हो न सही, जमीर हो जरूर, 
दूजे से  गरं डरते नहीं,खुद से तो डरोगे! 

दिल की सुनो, दिल में रहो,मैं दिल से कह रहा, 
काबू में जुबां न हो तो, किस किस से लड़ोगे?
------------------------ तनु थदानी




सोमवार, 15 सितंबर 2025

मैं रह गया तुमसे बिछड़,यादों की खान में!

मैं रह गया तुमसे बिछड़,यादों की खान में! 
उस लोक से आ जाओ न, फिर,मेरी जान में! 

वो घर था वहाँ तू थी, अब घर नहीं रहा, 
कैसे रहुंगा अब वहाँ मैं, उस मकान में  ! 

मेरी खुशी,जीने की चाह , तेरे  संग थी, 
तू ही तो थी रुतबे में, मेरी आन बान में! 

मैं हाथ थामें रह गया, तेरा जमीन पर, 
उड़ के चली गयी क्यूं  प्रिय, आसमान में  ! 
---------------------- तनु थदानी

बुधवार, 3 सितंबर 2025

जब आंसुओं से भी न,दर्दे दिल बया होगा


जब आंसुओं से भी न,दर्दे दिल बया होगा  ! 
तो प्रेमियों का हाले दिल ,क्या से क्या होगा! 

रहना है  तेरे साथ रच, मेंहदी की तरह, जो, 
सांसो में आने जाने सा, न बे हया होगा  ! 

पिघली हुई तारीखों में, गुम होंगे तेरे बाद , 
हाथों में महज़ एक, कैलेंडर नया होगा! 

जाते हैं जाने वाले चले, जाने कहाँ, पर, 
किस हाल में होगा,यहाँ, जो रह गया होगा! 
--------------------   तनु थदानी

मंगलवार, 26 अगस्त 2025

थे हम भी सिंधी, मगर हिन्दू ,हमें बे घर पड़ा होना

हमारी संस्कृति,  मिट्टी बनी, जो थी कभी सोना  ! 
बड़ी जिल्लत सी लगती है,यूँ अपने,देश को खोना  ! 

जलाया सिंध को जिसने,सभी थे सिंधी,पर मुस्लिम,
थे हम भी सिंधी, मगर हिन्दू ,हमें बे घर पड़ा होना  ! 

यहाँ हम  खुश हैं   सशरीर, पर महसूस होता है, 
हमारी आत्मा पे जख्म और टूटा सा इक कोना  ! 

कि जैसे मछलियों को, रेत दो ,पानी हटा कर के, 
करो महसूस  छटपटाहट वो , फिर जिंदगी ढ़ोना  ! 

जिन्होंने लूटा, मारा था ,पड़ोसी थे सभी सारे, 
कोई भी बाहरी न था, इन्हीं बातों का है रोना  ! 

अभी भी खेल भारत में  है जारी, टोपी वालों का, 
हश्र तुम सिंधियत का देख,सम्भलो और समझो ना !
------------------------- तनु थदानी






सोमवार, 18 अगस्त 2025

बरतन में पके खिचड़ी


बरतन में पके खिचड़ी, तो स्वस्थ, बनाती है! 
दिमाग में पके तो,  हम ही को, खा जाती है  ! 

मरने के लिए हमको , हर सुबह जगाती है! 
ये जिंदगी यूँ हम पर, एहसान जताती है! 

अपनी तो गरीबी हमें, उतना नहीं सताती, 
दूजे की अमीरी ही हमें , खूब सताती है  ! 

गुम होती खेलते ही, काग़ज़ की नाव जैसे, 
मरते ही तुम को दुनियाँ,कुछ ऐसे भुलाती है! 

तुम को भी ये पता है, कि हमको ये पता है,
जो गल्ती तुम्हारी है, झुकी पलकें बताती हैं! 

गरं ढूंढना है ढूंढो, खुद की ही खूबियों को, 
कमियाँ तो दुनिया सारी, ढूंढ ही  लाती है! 
--------------------------  तनु थदानी