शनिवार, 21 अक्टूबर 2023

तुम्हें तो प्यार हो न हो , मगर हम प्यार करते हैं!

तुम्हें मरहम लगाता हूँ ,हमारे हाथ जलते हैं !
तुम्हें तो प्यार हो न हो , मगर हम प्यार करते हैं!

तुझे हम प्यार करते हैं प्रिय , इसलिए तुझको
तुझे कमियों के संग संग ही,स्वीकार करते हैं !

कोई जो संग शर्तों के , करे है प्यार की बातें ,
मेरी मानो वो प्रेमी  , प्रेम संग व्यापार करते हैं !

हमने किया जो प्यार तो, साबित भी हम करें  ? 
हम ही से इस तरह का क्यूँ, व्यवहार करते हैं  ?? 
------------------------- तनु थदानी

शहर में तब्दील होते गाँव से पूछो

दिल से अमीरी को,किसी ने भी नहीं माना! 
बस माह की तन्ख्वाह,तरक्की का पैमाना! 

शहर में तब्दील होते , गाँव से पूछो, 
होता है क्या रूह से, बर्बाद हो जाना! 

चाकरी, ट्रैफ़िक, वही पिंजरेनुमा सा फ्लैट, 
ये है होता शहर में  , आबाद हो जाना! 

हम ये नहीं कहते की तुम, ऐसे नहीं जीओ, 
हम बूढ़ों को लेकिन,वृद्धाश्रम न पहुँचाना! 
------------------------  तनु थदानी

मंगलवार, 8 अगस्त 2023

tanu thadani तनु थदानी. इक उम्र गुजरती है

जो वक्त ने पढ़ाया , मास्टर जी क्या पढ़ाते !
जीवन  गुजारा  हमने , धोते- नहाते- खाते !

धरती पे सबका जीवन, शायद हसीन होता ,
तमीज से ही हम जो , पहचाने अगर जाते !

गंर आईने  में अपना, जो चित्र नहीं  दिखता ,
केवल चरित्र दिखता , तो हम भी सुधर जाते !

हम  जानवर  हैं  कैसे , कि  पेट के लिये ही ,
रब  का दिया  वो  तोहफा , ईमान बेच आते !

हम सभ्यता के आशिक, मंगल व चाँद छाने ,
जो  दिल  हमारे  पास , उसे भूल भूल जाते !

माँ सच है, पिता सच है , भाई बहन भी सच है ,
वो मौत भी तो सच है , हम क्यूँ हैं भूल जाते ?

पत्थर जमा किये क्यूँ ? कंकर जमा किये क्यूँ ??
इक  उम्र  है  गुजरती , ये  अक्ल  आते  आते !
-------------------------------- तनु थदानी

सोमवार, 10 जुलाई 2023

अंततः हे राम !

इंसान का जीवन, इंसान की नियति, इंसान फिर तमाम!
मिट्टी के खिलौने, मिट्टी का घरौंदा, फिर मिट्टी में विश्राम!

ओढ़ के रुआब, जागते ले ख्वाब, ख्वाहिश बेहिसाब, 
बेवजह ठसक, बेवजह कसक, अंततः हे राम !

दौड़ के लूटा, लुटा इस दौर में, हम सब हैं लुटेरे, 
दौलत भी की जमा, फिर इश्क भी जमा,पर खो गया आराम !

इतनी थी फुटानी, इतने थे हम ज्ञानी,इतना ही था रुतबा, 
इधर गिरा चरित्र, छूट गये मित्र,तो हो गये बे- दाम !
-----------------------------     तनु थदानी

गुरुवार, 29 जून 2023

tanu thadani तनु थदानी क्यूं है

चलन में बदचलन का; आचरण; होता क्यूं है ?
किया जो माफ उसे; फिर भला ; रोता क्यूं है ?




कभी न पूछना कि;प्यार से; हासिल क्या हुआ;
वफा की लाश को ; ताउम्र ; संजोता क्यूं है ?




वो जिसने सुख के लिये;जिस्म की;तौहीन कर दी;
उन सूखी राहतों में ; प्यार को ; ढ़ोता क्यूं है ?




यही है दुनियां ; सभी शक्ल पे ; नकाब चढ़ी ;
भला दिन रात फिर;अफसोस को;बोता क्यूं है?


वो जिसने ; साथ निभाने की कही; जन्मों तक;
वो मेरी आँखों में; सुईयों को; चुभोता क्यूं है ?


सभी हैं कहते कि;भगवान है;हर शै में बसा ;
भला फिर जिस्म से ; ईमान ये ; खोता क्यूं है ?
------------------------------ तनु थदानी















सोमवार, 19 जून 2023

tanu thadani तनु थदानी आखिर वो अपना बेटा है


ईश्वर जब से इन आँखों में ; इक खुशी दिखाना भूल गया !
बेटे से गिला नहीं ; वो तो बस ; चश्मा लाना भूल गया !


यूं तो है भुलक्कड़ नहीं मगर ; वो जाने कैसे भूल गया ;
मेरा बेटा ; घर में मेरा ; कमरा बनवाना भूल गया !


इक पिता ने मुझे बताया कि ; बेटे ने खूब तरक्की की ;
हर हफ्ते फोन तो है करता ; पर आना जाना भूल गया !


हम जीवन मसले दर्द रिसे ; हम बूढ़े कर भी सकते क्या ;
जो गोद में खा कर बड़ा हुआ ; वो हमें खिलाना भूल गया !


घर के आंगन की इक खटिया ; इक छड़ी व छाता इक लुंगी ;
इतनी सी दुनियां के आगे का ; तानाबाना भूल गया !


पोते के जनम की ख़बर न दी : नाराज क्यूं होती बेटे पर ;
बेटे ने कहा तो होगा पर ; मैं ही ये बताना भूल गया !


चल माफ उसे कर देते हैं ; आखिर वो अपना बेटा है ;
हम में ही होगी कमी ; जो हमको ; गले लगाना भूल गया !
-------------------------- तनु थदानी

मां का कमरा भूल गया tanu thadani तनु थदानी

कैसे भला जगाये उसे, जो खुली आंख से सोयेगा !
जीने के अभिनय मेंं अपनी, हंसी खुशी सब खोयेगा !

आफिस पैसे याद रहे पर, मां का कमरा भूल गया,
नहीं पता था मां को तेरी, इतना बड़ा तू होयेगा !

बहुत बैठकें कर ली बाहर, मां के संग भी बैठा कर,
बाद में मां की फोटो को तू ,देख हमेशा रोयेगा !

सबसे हाथ मिलाता है तू , बाहर खाना खाता है तू ,
नकली हंसी खुशी को पगले;कितना और तू ढ़ोयेगा ?
-----------------------------------  तनु थदानी