मंगलवार, 8 अगस्त 2023

tanu thadani तनु थदानी. इक उम्र गुजरती है

जो वक्त ने पढ़ाया , मास्टर जी क्या पढ़ाते !
जीवन  गुजारा  हमने , धोते- नहाते- खाते !

धरती पे सबका जीवन, शायद हसीन होता ,
तमीज से ही हम जो , पहचाने अगर जाते !

गंर आईने  में अपना, जो चित्र नहीं  दिखता ,
केवल चरित्र दिखता , तो हम भी सुधर जाते !

हम  जानवर  हैं  कैसे , कि  पेट के लिये ही ,
रब  का दिया  वो  तोहफा , ईमान बेच आते !

हम सभ्यता के आशिक, मंगल व चाँद छाने ,
जो  दिल  हमारे  पास , उसे भूल भूल जाते !

माँ सच है, पिता सच है , भाई बहन भी सच है ,
वो मौत भी तो सच है , हम क्यूँ हैं भूल जाते ?

पत्थर जमा किये क्यूँ ? कंकर जमा किये क्यूँ ??
इक  उम्र  है  गुजरती , ये  अक्ल  आते  आते !
-------------------------------- तनु थदानी

सोमवार, 10 जुलाई 2023

अंततः हे राम !

इंसान का जीवन, इंसान की नियति, इंसान फिर तमाम!
मिट्टी के खिलौने, मिट्टी का घरौंदा, फिर मिट्टी में विश्राम!

ओढ़ के रुआब, जागते ले ख्वाब, ख्वाहिश बेहिसाब, 
बेवजह ठसक, बेवजह कसक, अंततः हे राम !

दौड़ के लूटा, लुटा इस दौर में, हम सब हैं लुटेरे, 
दौलत भी की जमा, फिर इश्क भी जमा,पर खो गया आराम !

इतनी थी फुटानी, इतने थे हम ज्ञानी,इतना ही था रुतबा, 
इधर गिरा चरित्र, छूट गये मित्र,तो हो गये बे- दाम !
-----------------------------     तनु थदानी

गुरुवार, 29 जून 2023

tanu thadani तनु थदानी क्यूं है

चलन में बदचलन का; आचरण; होता क्यूं है ?
किया जो माफ उसे; फिर भला ; रोता क्यूं है ?




कभी न पूछना कि;प्यार से; हासिल क्या हुआ;
वफा की लाश को ; ताउम्र ; संजोता क्यूं है ?




वो जिसने सुख के लिये;जिस्म की;तौहीन कर दी;
उन सूखी राहतों में ; प्यार को ; ढ़ोता क्यूं है ?




यही है दुनियां ; सभी शक्ल पे ; नकाब चढ़ी ;
भला दिन रात फिर;अफसोस को;बोता क्यूं है?


वो जिसने ; साथ निभाने की कही; जन्मों तक;
वो मेरी आँखों में; सुईयों को; चुभोता क्यूं है ?


सभी हैं कहते कि;भगवान है;हर शै में बसा ;
भला फिर जिस्म से ; ईमान ये ; खोता क्यूं है ?
------------------------------ तनु थदानी















सोमवार, 19 जून 2023

tanu thadani तनु थदानी आखिर वो अपना बेटा है


ईश्वर जब से इन आँखों में ; इक खुशी दिखाना भूल गया !
बेटे से गिला नहीं ; वो तो बस ; चश्मा लाना भूल गया !


यूं तो है भुलक्कड़ नहीं मगर ; वो जाने कैसे भूल गया ;
मेरा बेटा ; घर में मेरा ; कमरा बनवाना भूल गया !


इक पिता ने मुझे बताया कि ; बेटे ने खूब तरक्की की ;
हर हफ्ते फोन तो है करता ; पर आना जाना भूल गया !


हम जीवन मसले दर्द रिसे ; हम बूढ़े कर भी सकते क्या ;
जो गोद में खा कर बड़ा हुआ ; वो हमें खिलाना भूल गया !


घर के आंगन की इक खटिया ; इक छड़ी व छाता इक लुंगी ;
इतनी सी दुनियां के आगे का ; तानाबाना भूल गया !


पोते के जनम की ख़बर न दी : नाराज क्यूं होती बेटे पर ;
बेटे ने कहा तो होगा पर ; मैं ही ये बताना भूल गया !


चल माफ उसे कर देते हैं ; आखिर वो अपना बेटा है ;
हम में ही होगी कमी ; जो हमको ; गले लगाना भूल गया !
-------------------------- तनु थदानी

मां का कमरा भूल गया tanu thadani तनु थदानी

कैसे भला जगाये उसे, जो खुली आंख से सोयेगा !
जीने के अभिनय मेंं अपनी, हंसी खुशी सब खोयेगा !

आफिस पैसे याद रहे पर, मां का कमरा भूल गया,
नहीं पता था मां को तेरी, इतना बड़ा तू होयेगा !

बहुत बैठकें कर ली बाहर, मां के संग भी बैठा कर,
बाद में मां की फोटो को तू ,देख हमेशा रोयेगा !

सबसे हाथ मिलाता है तू , बाहर खाना खाता है तू ,
नकली हंसी खुशी को पगले;कितना और तू ढ़ोयेगा ?
-----------------------------------  तनु थदानी

बुधवार, 14 जून 2023

गांव में आनंद है

मिट्टी है,खेल है, गांव में आनंद है!
मित्र संग मेल है, गांव में आनंद है!

ऐ शहर,खुश रहो, स्टेशनों के साथ में, 
पटरियां हैं, रेल है,  गांव में आनंद है!

ताड़पत्र,बेलपत्र,तुम किताबों में पढ़ो,
ताड़ हैं, ओं बेल है,  गांव में आनंद है!

माॅल की,सीढ़ियों की, नाप से हम दूर हैं, 
हफ्ते वाली सेल है,  गांव में आनंद है!

खा रिफाइंड खुश रहो, छोटे ओं बड़के शहर, 
घी है, सरसों तेल है,  गांव में आनंद है!

याद पहाड़े भी करते, हिन्दी भी जिंदा रखे,
इंग्लिश में फेल है,  गांव में आनंद है!

आज भी चबूतरा है, पंच हैं, सरपंच है, 
कोर्ट है ना जेल है , गांव में आनंद है!
----------------------- तनु थदानी

मंगलवार, 13 जून 2023

तनु थदानी सुख शब्द नहीं अवस्था है

दीदी जब से तुम भाग गयी, मेरा विद्यालय छूट गया!
हर बेटी के बाबू जी का, बेटी पे भरोसा टूट गया  !

मैं छोटी बच्ची हूँ दीदी, मैं भाग्य के माने क्या जानु?
सब कहते गल्ती है तेरी, पर भाग्य मेरा ही फूट गया!
अब पापा रोते छिप छिप कर, माँ बूढ़ी बूढ़ी लगती है, 
तेरी ख्वाहिश का कोलाहल, सन्नाटा घर में कूट गया!

मुझको तो बनना था डाक्टर, वो मेरा अपना था सपना, 
तेरा सपना किस हक से आखिर, मेरा सपना लूट गया?
सुख शब्द नहीं अवस्था है, वो मिले तभी जब सब राजी, 
तुम पढ़ी लिखी हो समझाओ,कि घर से क्यूँ सुख रूठ गया ?
-----------------------------------   तनु थदानी