बुधवार, 13 अगस्त 2025

मुगल तो बस लूटेरे थे

मुगल तो बस लूटेरे थे , हमें तो ये ही ध्यान है !
यही इतिहास का, कड़वा मगर , सच्चा बयान है !

भिखारी को खिलाने का , हमारा धर्म है , लेकिन ,
हमारा खा के ना समझे कि ,ये उसका मकान है !

तुम्हारा बाप तुमको नाम ,राहत दे के मर गया ,
मगर तुम में तो राहत का नहीं, नामो निशान हैं !

तुम्हारे बाप ने लड़ ले लिया , हिस्सा जमीन का ,
हमारे बाप का हिस्सा ही ये , हिन्दुस्तान है !!
----------------------- तनु थदानी

रट्टा मार के हिल हिल कर ये, कैसे कागज़ पढ़ता है!

रट्टा मार के हिल हिल कर ये, कैसे कागज़ पढ़ता है! 
हूर मिलेगी, बोल के, खुद पे, बम लपेट के मरता है! 

खुदा मिलेगा पढ़ नमाज,अजी ये सब फर्जी बातें हैं, 
ओट में सजदे ओं अजान के, काले धंधे करता है! 

खुद की नज़रें पाक नहीं, बुर्के में औरत बंद किया, 
अपनी गंदी नीयत पर फिर, नाम खुदा का धरता है! 

पीर फ़कीर मजार ओं फिरके,सब जेहाद के प्यादे हैं, 
सब उसके जैसे हो जायें, इसी लिये वो लड़ता है! 
-------------------------------  तनु थदानी

मंगलवार, 12 अगस्त 2025

ये ग़म तो एक खजाना है

ये ग़म तो  एक  खजाना है !
फिर सुख तो आना जाना है!

रहने की जगह औकात ही है,
बाकी  तो  मात्र  बहाना  है !

इतने शिकवे, साजिश, नफरत,
दिल  है  या  कबाड़खाना है ?

दिल की धकधक सांसो की लय,
सुन  ; जीवन एक  तराना  है !
------------------- तनु थदानी

गुरुवार, 7 अगस्त 2025

है अबूझ खाकी और काले, कोट की भाषा

है अबूझ  खाकी और काले, कोट की भाषा  ! 
मिले जो संग खादी का, बने वो ,खोट की भाषा! 

कटी  जेबें, लुटे जो हम, बना मसला नहीं कोई, 
हताहत हो गये पर पढ़ सके न, चोट की भाषा! 

चमक यूँ ही न आ जाती, सड़को नाली गलियों पे, 
पता है हर जिले के नेता जी को, वोट की भाषा !

मैं दुनियाँ घूम आया , पर नहीं ,आयी जुबां आड़े , 
समझते हैं सभी सारे जहाँ में, नोट की भाषा !

सुनाया भी नहीं था गम, कि वो रो पड़ा क्यों कि,
समझता था वो कंपकपाते हुए, होठ की भाषा !
--------------------------  तनु थदानी

गुरुवार, 31 जुलाई 2025

इक अपनों की लिस्ट बनाओ !

इक अपनों की लिस्ट बनाओ ! 
उनमें अपना ढ़ूंढ़ बताओ  ! 

एक भी अपना मिल जाये तो, 
ईश्वर का आभार जताओ  ! 

दिल से जो हैं कायम होते , 
उन रिश्तों के ही बन जाओ  ! 

जरुरत से जो बनते रिश्ते, 
हरगिज़ उनको मत अपनाओ  ! 

दुनियाँ में हम सब राही हैं, 
चलते, आते जाते जाओ  ! 

बुद्धिमान तो व्यस्त मिलेंगे, 
बस नादां इक दोस्त बनाओ! 
-----------  तनु थदानी

शुक्रवार, 25 जुलाई 2025

जो तुमसे दिल था लगाया

जो तुमसे दिल था लगाया, तो मैं सुलझ गया  ! 
तेरे घर,आ भी न पाया, जमाना उलझ गया  ! 

नहीं होता है साबित जिक्र से ,हैं एक मैं ओं तू, 
फिक्र ने ही  बताया, नहीं तो नासमझ गया! 

हमें तो कुछ नहीं आता, हमारी खुशनसीबी है, 
समझ ने जिसको नचाया, बेचारा समझ गया! 

सुकूँ के मायने ,जो शब्दकोशों ने ,दिये हमें, 
जीया तो,समझ आया, कि ये जीवन महज़ गया! 

तेरे बीमार होने और, तेरी मौत तक ए मित्र, 
आईना हम को दिखाया, चला तू सहज गया! 
----------------------  तनु थदानी





गुरुवार, 17 जुलाई 2025

किसी को हो पता, तो ये बता

किसी को हो पता, तो ये बता, कि क्या कहानी है ! 
निपटते एक लोटे राख में , फिर भी फुटानी है  ! 

मेरे भीतर जो था उसूल, वो  तोड़ा नहीं मैंने, 
गया कुचला वो, जिम्मेदारियों की ,कारस्तानी है ! 

ये तो  हो गया खिलवाड़, माना खेल जीवन को, 
इसी जीवन के खेल में ही, सांसे हार जानी है  ! 

अकल को खोद कर ,प्रगति के ,गढ्ढे बना दिये, 
सभी को है पता कि,अकल को न, अक्ल आनी है  ! 

तेरे सिर पे जो 'मैं' है, वो तुम्हें, देगा नहीं उठने, 
मगर उस 'मैं' को पालो, ये कहाँ की बुद्धिमानी है ? 

हमेशा से ,ये ही होता है, सबको सब पता होता, 
मगर लगता है ये कि, हमको ये ,बातें बतानी है! 
-----------------------    तनु थदानी