शुक्रवार, 4 अक्टूबर 2024

सैफई वाले नाच को, संस्कृति बताया,


सैफई वाले नाच को, संस्कृति बताया, 
वोटों के लिए रामभक्त, मार गिराया  ! 

मसला नहीं था ये , वो, पुल क्यूँ ढ़ह गया, 
ऐसा जो बना, वैसा, पैसा क्यूँ नहीं आया  ?? 

अफसर थे परेशान, बाकी का क्या लिखें, 
उन चार में था तीन तो, कागज पे बनाया  !

हम तो डकैत थे, यूँ ही चुनाव लड़ के फिर, 
डकैती को राजनीति में, व्यवहार कराया! 

ये ही है खूबसूरती,समाजवाद की, 
पूरे घर व रिश्तेदार को, चुनाव लड़वाया  ! 

----------------------  तनु थदानी

बुधवार, 21 अगस्त 2024

सुर खुद का न लगे, कहे गाना खराब है !


सुर खुद का न लगे, कहे गाना खराब है ! 
श्रोता ही न बेहतर, ये, बहाना खराब है  ! 

चालाकियाँ व हेरफेर,कर के फंसा स्वयं, 
अब बीच में भगवान को, लाना खराब है  ! 

इज्जत न मिली क्यों कि, सब को पता था, 
पैसे का उसके पास यूँ, आना खराब है  ! 

कर के गबन थी थोक की, दुकान खोल दी, 
 कितना किया कैसे ये,  बताना खराब है  ! 

उसने कहा कि सबको ,मिला के किया गबन, 
फिर थाना या फिर कोर्ट में, जाना खराब है  ! 

दे के उधारी जब वसूली, हो नहीं पायी , 
अब कह रहा हैं सबको, जमाना खराब है  ! 
---------------------- तनु थदानी





सोमवार, 12 अगस्त 2024

शातिर है आबादी बढ़ा, शरियत पे अड़ेगा!

शातिर है आबादी बढ़ा, शरियत पे अड़ेगा! 
गरं फंस गया तो मुख से, संविधान झड़ेगा! 

हिन्दू कहीं कोई पिट रहा ,वो मानता नहीं, 
बुद्धिजीवी है  इस बात पे ,कुतर्क करेगा! 

जब तक  अकारण ही , खुद नहीं पिटता,  
बुद्धिजीवी है, सो कुटने के ,बाद  डरेगा ! 

विश्व में बस एक ही, बदनाम कौम है, 
जो आश्रय देगा, उसी के हाथों मरेगा! 

जिसकी भी जमीं पे गया ,संस्कृति  खा गया, 
नीयत में बस जेहाद है, तो क्यों न लड़ेगा  ? 




सोमवार, 5 अगस्त 2024

दुख के सारे कारण भी तो, पैदा किये हम ही ने हैं


दुख के सारे कारण भी , पैदा किये हम ही ने हैं! 
रिश्तों के जेवर न सम्भाले ,कंकड़ पत्थर बीने हैं! 

मिले नहीं तो सब्र नहीं, मिल जाये तो कद्र नहीं, 
सीधे सीधे बोलूं तो हम, इंसा बड़े कमीने हैं  ! 

बिन मुहर्त ही पैदा होते, मरते बिना मुहुरत ही, 
पूरा जीवन मुहर्त पीछे ,भागे अकल से झीने हैं! 

रहना उसी को आता है, सहना जिसको हैआता , 
वरना जीवन क्या है, बस, सांसो के टुकड़े सीने हैं! 
----------------------------- तनु थदानी



बुधवार, 31 जुलाई 2024

ये उम्र का सिलबट्टा सबको, इक दिन चटनी कर जायेगा

ये उम्र का सिलबट्टा सबको, इक दिन चटनी कर जायेगा,
रूतबा व जाति रंग धरम,सब पिस के ढेर लगायेगा  ! 

हर बच्चा काफिर होता है, माँ को भगवान समझता है,
है सीधी सच्ची बात मगर वो, इसको व्यंग्य बतायेगा  ! 

मैं झूठ भी बोला करता हूँ, कभी पूछ के देखो हाल मेरा, 
सच बोल किसी को दुखी करूँ, ये मुझसे न हो पायेगा  !

सब कहते सबों से बेहतर हूँ, न जिद करता न रुठता हूँ, 
मालूम है सच ,जो  रूठुंगा, कोई भी नहीं मनायेगा  ! 

मतलब की टोपी पहन के जब,इज्जत के कपड़े भूला वो, 
नंगा क्या भला निचोड़ेगा,नंगा क्या भला नहायेगा  ? 

देता न किसी को पुण्य दगा, होता ही नहीं है पाप सगा, 
जो कर्म की है पूजा करता, क्या धर्म उसे ठग पायेगा! 
----------------------- तनु थदानी


सोमवार, 8 जुलाई 2024

सबके चेहरे पर है चेहरा

ज्यादा करो जो बातें पदवी,पागल की पा जाओगे, 
कम जो बातें  करोगे तो फिर, घमंडी कहलाओगे! 

केवल काम की बातें हो तो, पूरे हम मतलबी बने, 
सबके चेहरे पर है चेहरा, कभी समझ न पाओगे! 

जो सोचा कि सूकूं से बैठुंगा, घर जो है बना लिया, 
मगर चलाने घर को बंधु , इक यात्री बन जाओगे! 

खुशफहमी काआलम ये है,हस्ती मिटती नहीं हमारी, 
बोल बोल के गये सिमटते, कितनी चोटें खाओगे  ? 

सलाह सदा हारे की लेना , और तजुर्बा जीते का, 
पर दिमाग लेना खुद ही का, दुनिया में छा जाओगे! 
----------------------------  तनु थदानी



बुधवार, 3 जुलाई 2024

मिलते ही चार मुर्ख, बाबा पीर बन जाओ!

मिलते ही चार मुर्ख, बाबा पीर बन जाओ! 
दे झाड़ -फूंक- प्रवचन, अमीर बन जाओ! 

दुनियाँ को लूटना हो तो बन जाओ सिंकदर, 
दुनियाँ का हो जाना हो तो, कबीर बन जाओ! 

चलते रहो फिरते रहो, अस्तित्व बचा कर, 
ऐसा न हो कि तुम भी, इक भीड़ बन जाओ, 

रांझा बने तुम, सामने है मृग - तृष्णा, 
क्यों कह रहे हो उसे, कि हीर  बन जाओ!

पैसे कमाये नींद बेच, सुकून के बाजार, 
इससे तो है  बेहतर कि, फकीर बन जाओ! 
-------------------------- तनु थदानी