बुधवार, 31 जुलाई 2024

ये उम्र का सिलबट्टा सबको, इक दिन चटनी कर जायेगा

ये उम्र का सिलबट्टा सबको, इक दिन चटनी कर जायेगा,
रूतबा व जाति रंग धरम,सब पिस के ढेर लगायेगा  ! 

हर बच्चा काफिर होता है, माँ को भगवान समझता है,
है सीधी सच्ची बात मगर वो, इसको व्यंग्य बतायेगा  ! 

मैं झूठ भी बोला करता हूँ, कभी पूछ के देखो हाल मेरा, 
सच बोल किसी को दुखी करूँ, ये मुझसे न हो पायेगा  !

सब कहते सबों से बेहतर हूँ, न जिद करता न रुठता हूँ, 
मालूम है सच ,जो  रूठुंगा, कोई भी नहीं मनायेगा  ! 

मतलब की टोपी पहन के जब,इज्जत के कपड़े भूला वो, 
नंगा क्या भला निचोड़ेगा,नंगा क्या भला नहायेगा  ? 

देता न किसी को पुण्य दगा, होता ही नहीं है पाप सगा, 
जो कर्म की है पूजा करता, क्या धर्म उसे ठग पायेगा! 
----------------------- तनु थदानी


सोमवार, 8 जुलाई 2024

सबके चेहरे पर है चेहरा

ज्यादा करो जो बातें पदवी,पागल की पा जाओगे, 
कम जो बातें  करोगे तो फिर, घमंडी कहलाओगे! 

केवल काम की बातें हो तो, पूरे हम मतलबी बने, 
सबके चेहरे पर है चेहरा, कभी समझ न पाओगे! 

जो सोचा कि सूकूं से बैठुंगा, घर जो है बना लिया, 
मगर चलाने घर को बंधु , इक यात्री बन जाओगे! 

खुशफहमी काआलम ये है,हस्ती मिटती नहीं हमारी, 
बोल बोल के गये सिमटते, कितनी चोटें खाओगे  ? 

सलाह सदा हारे की लेना , और तजुर्बा जीते का, 
पर दिमाग लेना खुद ही का, दुनिया में छा जाओगे! 
----------------------------  तनु थदानी



बुधवार, 3 जुलाई 2024

मिलते ही चार मुर्ख, बाबा पीर बन जाओ!

मिलते ही चार मुर्ख, बाबा पीर बन जाओ! 
दे झाड़ -फूंक- प्रवचन, अमीर बन जाओ! 

दुनियाँ को लूटना हो तो बन जाओ सिंकदर, 
दुनियाँ का हो जाना हो तो, कबीर बन जाओ! 

चलते रहो फिरते रहो, अस्तित्व बचा कर, 
ऐसा न हो कि तुम भी, इक भीड़ बन जाओ, 

रांझा बने तुम, सामने है मृग - तृष्णा, 
क्यों कह रहे हो उसे, कि हीर  बन जाओ!

पैसे कमाये नींद बेच, सुकून के बाजार, 
इससे तो है  बेहतर कि, फकीर बन जाओ! 
-------------------------- तनु थदानी





बुधवार, 26 जून 2024

बात अगर व्यापार की हो,अक्ल को दोस्त बनाओ जी!

बात अगर व्यापार की हो,अक्ल को दोस्त बनाओ जी! 
रिश्तेदारी में लेकिन बस, दिल के संग ही जाओ जी! 

वसीयत हैसियत पूछने वाले, बहुतेरे मिल जायेंगे, 
मिलने पर तबियत जो पूछे, ऐसे दोस्त बनाओ जी!

घर में बरतन होंगे तो, टकरायेंगे ओं खनकेंगे, 
खुशी से हो जीवन जीना तो ,थोड़े गम भी खाओ जी! 

एक निराशा, एक हताशा, क्या तुम से बलशाली है? 
बाद सुबह के रात भी आती, रात को भी अपनाओ जी! 

राजनीति को  झगड़े -  दंगो, संग गुजारा करना है, 
तुम तो परिवारिक हो अपनी, जुबां पे मिश्री लाओ जी! 
------------------------------  तनु थदानी


रविवार, 23 जून 2024

गलती तुम्हारी है

थे  सत्य पे फिर भी डरे, गलती  तुम्हारी  है! 
फिर कह रहे हो क्या करें,गलती तुम्हारी  है! 

जनम गरीबी में हुआ, न गलती तुम्हारी , 
अगर गरीबी में मरे, गलती तुम्हारी है  ! 

जाति व वर्ण धर्म में , तुम ही  बस श्रेष्ठ हो , 
ये बोल के जो तुम लड़े,गलती  तुम्हारी है! 

वो हज गया था, सो वो बे- ईमान न रहा, 
जो माना ये खड़े खड़े,गलती तुम्हारी है  ! 

जब देश हित से परे, जाति के संग खड़े,
अब लालू जो चारा चरे, गलती  तुम्हारी है! 

सात पुश्त तेरे वोट से, खुशहाल कर गया, 
हाथों पे हाथ हो धरे, गलती  तुम्हारी  है! 

जाति का सुरमा डाल के, आंखें निकाल लीं, 
उल्लू हो तुम इतने बड़े,  गलती तुम्हारी है! 

अपने ही घर में, अल्पसंख्यक बनते जा रहे, 
अब भी तो मान लो अरे, गलती तुम्हारी है!
------------------------  तनु थदानी

सोमवार, 17 जून 2024

वो मेरे पक्ष में ,यूँ ही नहीं आया होगा!

वो मेरे पक्ष में  ,यूँ ही नहीं , आया होगा! 
उसका भी कोई काम, निकल आया होगा! 

दिखी बारात में छाया , पुराने वस्त्रों में, 
जरुर बेटी के ही, बाप का, साया होगा! 

बड़ा भाई तुम्हारे जश्न में, शामिल नहीं था, 
तुमने शायद न सलीके से, बुलाया होगा! 

जान जाने को थी,प्यार से अंजान था वो
नफे नुकसान में ही ,वक्त गंवाया होगा! 

मिठाई भी तुम्हे मीठी नहीं ,लगी, तो फिर, 
मुझे शक है कि ,अकेले में ही खाया होगा! 

भला परिवार में शामिल हुआ वापिस वो कैसे, 
बुरे से वक्त ने ही उसको, समझाया होगा! 

था चुप ,समझ में आ गया, शासन को कैसे , 
क्या उसके मौन ने ही ढ़ोल, बजाया होगा? 

की बेटा दुध से ,खुश्बू से नहा खूब खिले, 
वो बाप रोज पसीने से  , नहाया होगा  ! 

पढ़ाई कर हमें ही छोड़ , अब जाते हैं बेटे, 
शायद हमने ही उनको, गलत पढ़ाया होगा! 
------------------------  तनु थदानी




मंगलवार, 11 जून 2024

नश्वर चीजों के खातिर हम, पूरा ही जीवन हैं लड़ते !

नश्वर चीजों के खातिर हम, पूरा ही जीवन हैं लड़ते  !
मटके में छेद है जान के भी, अन्जान बने पानी भरते! 
 
अब पैसे से आराम नहीं, इक खौफ का रुतबा आता है, 
बेटा पढ़ लिख अब कमा रहा, सो बाबू जी भी हैं डरते! 

इज्जत इंसान की न होती, जरूरत की इज्जत होती है
पेंशन न हो तो बाबूजी, मन मार के रोज मरा करते  ! 

हम अनपढ़ हैं, हमरे कारण ही, हिंदी भाषा बची हुई, 
वरना तुम अंग्रेजी पढ़ कर, तो राम- राम भी ना करते! 

ये गज़ब हमारे देश का भी, है  मौसम का अंदाज तनु, 
लू से तो न मरते जितने, पैसों की गर्मी से मरते!
-------------------------------  तनु थदानी